वहीं, इंडियन आर्मी में सूबेदार मनीष कौशिक सेमीफाइनल में पहुंचने वाले दूसरे भारतीय बॉक्सर थे, जिन्हें कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। फाइनल में पहुंचने से ठीक एक कदम पहले 63 किग्रा भारवर्ग में उन्हें सेमीफाइनल में क्यूबा के मुक्केबाज एंडी गोम्ज ने 5-0 के अंतर से रौंदा। इस तरह इस टूर्नामेंट में उनका सफर खत्म हुआ।
पहले 60 किलोग्राम में खेलने वाले मनीष ने हाल ही में 63 किलोग्राम में स्विच किया है. और इस कैटेगरी में उनका प्रदर्शन शानदार रहा है। साल 2017 में शिवा थापा को हराकर नेशनल चैंपियन बनने वाले कौशिक ने 2018 के इंडिया ओपन बॉक्सिंग टूर्नामेंट में भी उन्हें मात दी थी, हालांकि इस साल हुए इंडिया ओपन के फाइनल में थापा ने अपनी हार का बदला लेते हुए उन्हें 5-0 से हराकर गोल्ड मेडल जीत लिया था। मनीष कॉमनवेल्थ गेम्स के सिल्वर मेडल और इंडिया ओपन में गोल्ड जीत चुके हैं।
अब तक सिर्फ ब्रॉन्ज मेडल
बता दें कि यह विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भारतीय टीम का अबतक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। इससे पहले भारत के दो बॉक्सर कभी भी सेमीफाइनल तक नहीं पहुंचे थे। इससे पहले देश ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में चार ब्रॉन्ज जीते हैं। इससे पहले भारतीय मुक्केबाजों ने विश्व चैंपियनशिप में 4 ब्रॉन्ज मेडल जीते हैं। विजेंदर सिंह ने 2009 में, विकास कृष्ण ने 2011 में, शिव थापा ने 2015 और गौरव बिधुड़ी ने 2017 में ब्रॉन्ज मेडल जीते थे।