यह वही चैंपियनशिप है जिसके लिए इंटरनेशनल फेडरेशन ने भारतीय टीम को पोलैंड में खेलने से रोक दिया था। फेडरेशन का तर्क था कि भारत की ओर से खेलने वाले लिफ्टरों के व्हेयर अबाउट (डोप टेस्ट के लिए खिलाड़ियों की सूचना) नहीं भेजी गई है। यह सूचना एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज ने इंडियन वेटलिफ्टिंग फेडरेशन को नहीं दी थी। इसी चैंपियनशिप के लिए चुनी गई चार सदस्यीय टीम में पूनम दलाल का नाम था।
हालांकि इस ट्रायल में नाडा की ओर से लिए गए सैंपल में दो अन्य लिफ्टर डोप में फंसे थे लेकिन उनका टीम में चयन नहीं हुआ था। उस दौरान तो इंडियन फेडरेशन बच गई, लेकिन अब पूनम का डोप में फंसना उसे भारी पड़ सकता है। नए नियम केमुताबिक 2020 तक अगर किसी देश के 20 लिफ्टर डोप में फंसते हैं तो उनका एक-एक वेटलिफ्टर ही ओलंपिक में खेल पाएगा। पूनम के डोप में फंसने से भारतीय लिफ्टरों के अंतरराष्ट्रीय टेस्टिंग में फंसने की संख्या 14 हो गई है।