हरियाणा के भिवानी की अरुणा के पिता नरेश एक टैक्सी ड्राइवर हैं। पर बिटिया को कभी किसी चीज की कमी नहीं होने दी। वह कहते हैं अरुणा हमारे लिए बहुत स्पेशल थी। हमारी पहली संतान थी। हालांकि गांववाले ताने देते थे कि एक तो बिटिया ऊपर से दिव्यांग। पर समय के साथ सब बदलता चला गया। जो कभी ताने देते थे अब वहीं उसकी प्रशंसा करते हैं। हमें अरुणा पर नाज है। अब लोग मुझे अरुणा के पापा के नाम से जानते हैं। एक पिता के लिए इससे बड़ी बात क्या हो सकती है।
कभी खाली नहीं लौटी
ताइक्वांडो संघ के महासचिव सुखदेव कहते हैं कि वह कभी किसी टूर्नामेंट से खाली नहीं लौटी हैं। हमें पूरी उम्मीद है कि वह टोक्यो से पदक लेकर ही लौटेंगी। रोहतक में कोच स्वराज सिंह की देखरेख में अभ्यास कर रही अरुणा 27 अगस्त को टोक्यो रवाना होगी। अरुणा के साथ उनके निजी कोच नहीं जा पाएंगे। अरुणा ने पांचवीं कक्षा से जूडो-कराटे से शुरुआत की थी। पांच साल पहले 2016 में उन्होंने पैरा ताइक्वांडो शुरू कर दिया। पहली बार 2018 में एशियाई पैरा ताइक्वांडो चैंपियनशिप में रजत पदक जीता था उसके बाद से पीछे मुड़कर नहीं देखा। दुनिया की चौथे नंबर की खिलाड़ी अरुणा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक स्वर्ण, दो रजत व दो कांस्य सहित कुल पांच पदक जीते हैं। चंडीगढ़ विश्वविद्यालय से बीपीएड कर रही अरुणा पांच बार की राष्ट्रीय चैंपियन हैं।