पहले किक बॉक्सिंग करतीं थीं
लवलीना मुक्केबाजी में आने से पहले किक बॉक्सिंग करती थीं, जिसमें वो राष्ट्रीय स्तर पर पदक भी जीत चुकी हैं। दरअसल, लवलीना ने अपनी बड़ी बहनों लीचा और लीमा को देखकर किक बॉक्सिंग करना शुरू किया था। बचपन में लवलीना को काफी संघर्ष का सामना करना पड़ा। ओलंपिक में देश के लिए दूसरा पदक पक्का करने वाली मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन को मुक्केबाजी में लाने का श्रेय बोरो को जाता है। बोरो को लवलीना पर विश्वास था।
पिता एक छोटे व्यापारी
लवलीना बोरगोहेन के पिता टिकेन एक छोटे व्यापारी थे और 1300 रुपये महीना कमाते थे। असम से ओलंपिक की राह इतनी आसान नहीं थी। मगर इस मुक्केबाज ने दिखा दिया कि अगर हिम्मत व जुनून के आगे कुछ भी मुश्किल नहीं होता। लवलीना अपनी मां के स्वास्थ्य को लेकर काफी चिंतित थीं। मां की सफल सर्जरी के बाद ही लवलीना वापस अभ्यास के लिए गईं। लवलीना ने वीडियो का सहारा लेकर अभ्यास किया और मुक्केबाजी में भारत के लिए पदक पक्का किया।
कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा
लवलीना को बुधवार को सेमीफाइनल मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा। इसके साथ ही उन्होंने टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीता। लवलीना से पहले विजेंदर सिंह ने 2008 बीजिंग ओलंपिक में और एमसी मेरीकॉम ने 2012 लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था। बता दें कि लवलिना 2018 और 2019 में हुए विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। इसके अलावा 2018 कॉमनेवल्थ गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।