एएआई भी उनके खिलाफ कार्रवाई का मन बनाकर बैठी है। जीवनजोत का कहना है कि उन्हें तुर्की जाने का टिकट सुबह भेजा गया जबकि शाम को फ्लाइट थी। उस वक्त वह पटियाला में थे। फिर उनका वीजा भी नहीं लगा था। वह पहले ही विरोध में इस्तीफा दे चुके थे तो कैसे जा सकते थे।
सच्चाई यह है कि द्रोणाचार्य अवॉर्ड के लिए नाम कटने पर जीवनजोत ने खेल मंत्रालय के खिलाफ खुलेआम अभियान छेड़ दिया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से बयान जारी किए और कोच पद से इस्तीफा दे दिया।
जीवनजोत के खिलाफ पहले भी वर्ल्ड यूनिवर्सियाड के दौरान लापरवाही के आरोप लग चुके हैं। इन खेलों में भारतीय टीम अपना कांस्य पदक मुकाबला ही खेलने के लिए नहीं पहुंची थी। उन पर आरोप था कि मुकाबले के दौरान टीम स्टेडियम में ही नहीं थी। इसी को आधार बना मंत्रालय ने उनका नाम अवॉर्ड के लिए काटा था।