बजट कटौती की मार झेल रहे खेल मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय से कटे बजट को वापस दिए जाने की गुहार लगाई है। खास बात यह है कि मंत्रालय की ओर से लिखे गए पत्र में सुस्त रफ्तार खर्च की बात स्वीकार की गई है।
खेल सचिव राहुल भटनागर की ओर से एक्सपेंडीचर सचिव अजय नारायण झा को लिखे गए पत्र में सर्वाधिक चिंता सरकार के फ्लैगशिप कार्यक्रम खेलो इंडिया का बजट घटाए जाने पर जताई गई है। मंत्रालय ने साफ किया है कि बजट कटौती से इस कार्यक्रम के क्रियान्यवयन पर असर पड़ेगा।
यही नहीं काटे गए बजट की बहाली के अलावा मंत्रालय ने 164 करोड़ रुपये अतिरिक्त मदद की मांग की है। यह पैसा मंत्रालय को अदालत के निर्देश पर हाईकोर्ट में जमा कराना है। अटारनी जनरल की ओर से इस मामले में मंत्रालय को एसएलपी नहीं दाखिल करने की हिदायत दी गई है।
मंत्रालय की ओर से तर्क दिया गया है कि खेलो इंडिया स्कीम जिसके 12 वर्टिकल हैं, इसका खर्च साल भर एक जैसा नहीं रह सकता है, जिसके चलते पहले और दूसरे क्वार्टर में कम खर्च हुआ है। लेकिन अब खेलो इंडिया यूथ गेम्स निर्धारित है, जिसके चलते तीसरे और चौथे क्वार्टर में खर्च की रफ्तार बढ़ेगी।
अगर 520.09 में से काटे गए 220 करोड़ रुपये को वापस नहीं किया गया तो इस स्कीम को लागू करने में असर पड़ेगा। सूत्र बताते हैं कि खेल सचिव की ओर से बजट केसंबंध में कैबिनेट सचिव से भी बात चल रही है। यही नहीं मंत्रालय ने खेल संघों और एनएसडीएफ के काटे गए 72 करोड़ रुपये के बजट के लिए साई को जिम्मेदार ठहराया है।
पत्र में लिखा गया है कि साई की ओर से पैसे को ट्रांसफर किए जाने की योजना पब्लिक फाइनेंसियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) और एक्सपेंडीचर एडवांस ट्रांसफर (ईएटी) को अब तक शत प्रतिशत लागू नहीं किया जा सकता है, जिसके यहां खर्च की रफ्तार सुस्त रही है। यह पैसा ओलंपिक की तैयारियों से जुड़ा है लिहाजा इसकी कटौती से भी नुकसान होगा।