अवॉर्ड कमेटी ने सोमवार को कोरोना काल में आए अत्यधिक आवेदनों को ध्यान में रखते हुए ध्यानचंद अवॉर्ड के लिए 15 और द्रोणाचार्य के लिए 13 नामों की सिफारिश की है। कमेटी ने इस बार ऐसे नामों की सिफारिश की है जो अवॉर्ड के लिए या तो अदालत जा चुके हैं या फिर लंबे समय से आवेदन कर रहे हैं। लाइफ टाइम द्रोणाचार्य के लिए आठ और नियमित द्रोणाचार्य के लिए पांच नामों में जसपाल और जूड के अलावा वूशु कोच कुलदीप हांडू, पैरा बैडमिंटन कोच गौरव खन्ना और मलखंब कोच योगेश मालवीय के नाम की सिफारिश हुई है। लाइफ टाइम के लिए तीरंदाजी कोच धर्मेंद्र तिवारी, बॉक्सिंग कोच शिव सिंह, कुश्ती कोच ओपी सिंह और अश्वनी नचप्पा और रोजा कुट्टी के कोच रहे पुरुषोत्तम रॉय प्रमुख हैं।
दिल्ली में हुए 1951 के पहले एशियाई खेलों में देश को स्वर्ण पदक दिलाने वाले तैराक सचिन नाग को भी आखिर याद कर लिया गया। उनके पुत्र अशोक नाग लंबे समय से पिता को अवॉर्ड दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। इस बार उनका नाम मरणोपरांत ध्यानचंद पुरस्कार के लिए नामित किया गया है।
टैक्सी चलाने वाले बॉक्सर लक्खा भी नामित
ध्यानचंद के लिए 1996 के ओलंपियन बॉक्सर लक्खा सिंह का नाम भेजा गया है। यह वही लक्खा हैं जिन्हें अपनी आजीविका चलाने के लिए टैक्सी चलानी पड़ रही है। भारतीय फुटबॉल टीम के कोच रहे सुखविंदर सिंह संधू, हॉकी खिलाड़ी गगन अजीत सिंह के पिता ओलंपियन अजीत सिंह, टेनिस खिलाड़ी नंदन बल, एथलीट जिंसी फिलिप्स, शटलर प्रदीप गांधे, पहलवान एनपी हुड्डा और कबड्डी खिलाड़ी मनप्रीत सिंह के नाम की सिफारिश भी ध्यानचंद अवॉर्ड के लिए की गई है।
श्रीलंका के खिलाफ 264 रन की पारी के दौरान रोहित शर्मा
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खिलाड़ियों को दिए जाने वाले देश के सर्वोच्च खेल रत्न पुरस्कार और अर्जुन पुरस्कार पर फैसला मंगलवार को होगा। हालांकि पुरस्कार समिति के लिए इस बार फैसला करना आसान नहीं होगा। क्रिकेटर रोहित शर्मा, पहलवान विनेश फोगाट और स्टार जवेलिन थ्रोअर नीरज चोपड़ा सहित रिकॉर्ड 38 खिलाड़ियों ने खेल रत्न के लिए दावा ठोका है। वहीं क्रिकेटर शिखर धवन, दीप्ति शर्मा और इशांत शर्मा सहित सर्वाधिक 215 खिलाड़ियों ने अर्जुन के लिए आवेदन किया है।
आए थे रिकॉर्ड आवेदन
ध्यानचंद अवॉर्ड के लिए रिकॉर्ड 98 और द्रोणाचार्य के लिए 137 नामों का आवेदन आया। इसी को ध्यान में रखते हुए कमेटी ने इतने नामों की सिफारिश की है। हालांकि यह खेल मंत्री पर निर्भर करेगा कि कितने नामों पर वह अवॉर्ड के लिए मुहर लगाते हैं। पिछली बार पांच ध्यानचंद और आठ द्रोणाचार्य अवॉर्ड दिए गए थे। इस बार इस संख्या का बढ़ना तय है।