भारतीय पहलवान और एशियाई चैंपियन बजरंग पूनिया ने टोक्यो ओलंपिक के ऊपर स्वास्थ्य और जान को तरजीह दी है। हरियाणा के इस लाल ने कहा कि कोविड-19 के प्रकोप के बीच एथलीटों की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए।
पूनिया ने कहा कि, 'सर्वप्रथम, हमें कोरोनावायरस से लड़ना होगा। समूचे विश्व में यह बीमारी महामारी की तरह फैल चुकी है। इस दौरान ओलंपिक का आयोजन खतरे से खाली नहीं होगा, क्योंकि कोई नहीं जानता कि हालात सुधरने में कितना वक्त लगेगा। जिंदगी रही तो ओलिंपिक खेल पाएंगे। लेकिन अगर कोई अपनी जिंदगी ही गंवा दे तो फिर ओलिंपिक का क्या मतलब है?'
बजरंग टोक्यो ओलंपिक टालने के बड़े पक्षधर है, उनका साफ तौर पर कहना है कि अगर जिंदगी रही तो ओलंपिक खेल पाएंगे। राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित इस पहलवान का बयान तब आया जब कनाडा ने खेलों के इस महाकुंभ के बहिष्कार का एलान कर दिया।
65 किलो वर्ग में दुनिया के श्रेष्ठ पहलवानों में शुमार बजरंग का कहना है कि, 'अगर इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) तय समय पर ही टोक्यो ओलंपिक का आयोजन करता है और दूसरे देश भी इसमें शामिल होते हैं तो मजबूरन हमें भी भाग लेना होगा, लेकिन अगर वे दो-चार माह में हालात सामान्य होने का इंतजार किया जाए तो सभी की भलाई ही होगी।
इस बीच कनाडा ने इंटरनेशनल ओलंपिक संघ (IOC) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से अपील की है कि इन खेलों को एक साल के लिए टाल दिया जाए। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया ने भी अपने खिलाड़ियों को 2021 टोक्यो ओलंपिक की तैयारी के लिए बोल दिया है।