यह पूछने पर कि एमएमए में जाने का प्रमुख कारण क्या है तो ग्रेपलर ने जवाब दिया, 'हमारे परिवार में सभी पहलवान हैं। लोगों को मुझसे उम्मीदें हैं क्योंकि मैं गीता और बबिता की बहन हूं। मैं उनकी उम्मीदों और आकांक्षाओं को पूरा करना चाहती हूं, लेकिन मैट पर नहीं बल्कि जाली में।'
ऋतु ने यह भी बताया कि वह अपनी बहनों से अधिक साहसी हैं। उन्होंने कहा, 'रेसलिंग मेरा पहला प्यार है। मुझे इसकी काफी कमी खलेगी, लेकिन मैं अपनी बहनों से अलग हूं। मैं नई शुरुआत करने को बेताब हूं।'
ऋतु के फैसले ने भारतीय रेसलिंग संघ को तगड़ा झटका दिया है, जिन्होंने दावा किया है कि पहलवान ने चोट का बहाना बनाकर उन्हें अंधेरे में रखा। बहरहाल, एमएमए से जुड़ने के कारण ऋतु के हाथ से 2020 टोक्यो ओलंपिक में मेडल जीतने का मौका फिसल गया है।
ऋतु के फैसले पर भारतीय रेसलिंग संघ के सहायक सचिव विनोद तोमर ने कहा, 'यह हमारे लिए हैरानीभर खबर है। लेकिन उन्होंने अगर एमएमए से जुड़ने का फैसला किया है तो उनका एमेच्यॉर करियर समाप्त हो गया है। विश्वास कीजिए कि मुझे ऋतु के फैसले पर विश्वास नहीं हो रहा है। ऋतु भारत की प्रतिभाशाली पहलवानों में से एक थी। मुझे उम्मीद है कि उन्हें इसके परिणाम पता होंगे कि वह भारत का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकेंगी।'
बता दें कि इस महीने की शुरुआत में लखनऊ में हुई महिलाओं की सीनियर राष्ट्रीय रेसलिंग कैंप से ऋतु ने चोट का हवाला देकर किनारा कर लिया था। तोमर ने कहा, 'ऋतु को हमें यह बात बताना चाहिए थी। उन्होंने पिछले सप्ताह फोन पर कहा कि वह चोटिल हैं। उन्होंने इच्छा जताई कि उनके वजन वर्ग में छोटी बहन संगीता देश का प्रतिनिधित्व करें। हमने ऋतु में काफी निवेश किया है। यह हमारे लिए बड़ा नुकसान है।'
वहीं हरियाणा के बलाली गांव में ऋतु का परिवार काफी उत्साहित है। ऋतु के पिता महावीर फोगाट ने कहा, 'यह एक रात में लिया गया फैसला नहीं है। मेरी बेटी एमएमए की बड़ी फैन है। एक दिन उसने मुझे कहा था कि वह एमएमए में अपने हाथ आजमाना चाहती है।'