जापान में डॉक्टरों के संगठन अगले महीने होने वाले ओलंपिक खेलों के आयोजन को लेकर लगातार अधिक चिंतित होते जा रहे हैं। उनकी राय में जिस समय देश में कोरोना वायरस का संक्रमण बेकाबू बना हुआ है, उस वक्त 200 देशों से 78 हजार से ज्यादा लोगों को देश में आने देना एक बड़ा जोखिम मोल लेना है। जापान में कोरोना वैक्सीन को लगाने की रफ्तार भी बेहद धीमी बनी हुई है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक आयोजकों ने पहले खेलों के लिए दस हजार डॉक्टरों, नर्सों और मेडिकल स्टाफ को तैयार रखने की योजना बनाई थी। लेकिन देश के मेडिकल कर्मी इस समय महामारी पर काबू पाने की मुहिम में जुटे हुए हैं। ऐसे में अब ये कहा है कि उतनी संख्या में मेडिकल कर्मी उपलब्ध नहीं पाएंगे। आयोजकों ने कहा है कि अब खेलों के दौरान सात हजार मेडिकल कर्मियों को सेवा देने के लिए तैयार रखा जाएगा।
फिलहाल, राजधानी टोक्यो और कई दूसरे बड़े शहरों में महामारी की वजह से आपातकाल लागू है। इसकी अवधि दो बार बढ़ाई जा चुकी है। टोक्यो के अखबार जापान टाइम्स के मुताबिक ये अवधि तीसरी बार भी बढ़ाई जाने वाली है। गौरतलब है कि अमेरिका एथलेटिक्स एसोसिएशन ने पिछले हफ्ते कहा था कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो अमेरिकी एथलीटों की जापान यात्रा रद्द कर दी जाएगी।
अब जापान मेडिकल वर्कर्स यूनियन की महासचिव सुसुमू मोरिता ने कहा है- ‘लोगों की जिंदगी और मरीजों की सेहत की कीमत पर ओलंपिक खेलों के आयोजन पर हमें गहरा एतराज है।’ 23 जुलाई से आठ अगस्त तक चलने वाले ओलंपिक खेलों में विदेशी दर्शकों के आने पर रोक लगाई जा चुकी है। अब चर्चा है कि संभवतः जापान के देसी दर्शकों के भी स्टेडियमों में जाने पर रोक लगा दी जाएगी। इसलिए अनेक हलकों से ऐसे सवाल पूछे गए हैं कि जब कोई दर्शक मैदान में होगा, तो आखिर इन खेलों का आयोजन किसके लिए कराया जा रहा है?
जापान में हाल में हुए तमाम जनमत सर्वेक्षणों में इन खेलों के रद्द करने की राय को भारी बहुमत समर्थन मिला है। कुछ प्रायोजक कंपनियां भी ऐसे सुझाव दे चुकी हैं। जापान के कई बड़े कारोबारियों ने इन खेलों को रद्द करने की मांग की है। उनमें सॉफ्ट बैंक संस्थापक अरबपति मासायोशी सॉन भी शामिल हैं। जापान के प्रभावशाली अखबार असाही ने पिछले हफ्ते एक संपादकीय में प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा से अपील की कि वे खेलों को रद्द करने का फैसला करें। असाही इस बार ओलंपिक खेलों का मीडिया पार्टनर भी है।
लेकिन अब तक प्रधानमंत्री सुगा यही कहते रहे हैं कि सरकार ओलंपिक खेलों को सुरक्षित ढंग से कराने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा है कि खिलाड़ी संक्रमित ना हों, इसे सुनिश्चित करने के लिए तमाम इंतजाम किए जा रहे हैं। जापान सरकार का यह भी कहना है कि इस मामले में अंतिम फैसला अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) को लेना है और उसका जो भी निर्णय होगा, उसे मानने के लिए जापान सरकार वचनबद्ध है।
इस बीच टोक्यो मेडिकल एसोसिएशन ने कहा- ‘कई ऐसे देश हैं जो अब भी महामारी का सामना करने में जुटे हुए हैँ। ऐसे देशों के खिलाड़ियों को जापान आने देना बेहद जोखिम भरा है। साथ ही अगर हमने अपने स्टाफ को ओलंपिक खेलों के आयोजन में लगाया, तो उससे देश के अंदर अस्पतालों की व्यवस्था पर बुरा असर पड़ेगा।’ लेकिन अब तक आईओसी ने ऐसी बातों को लेकर अपने कान बंद कर रखे हैं। इससे जापान में चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ रही है।