भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) चाहता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी निशानेबाजी को 2022 बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों से बाहर करने का मुद्दा अपने ब्रिटिश समकक्ष बोरिस जानसन के साथ उठाए। संघ का कहना है कि निशानेबाजी को बाहर करना पूरे उप महाद्वीप के लिए खेल को पीछे ले जाने वाला कदम है। एनआरएआई अध्यक्ष रानिंदर सिंह ने मोदी से अपील की कि वह खेल को दोबारा राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल करने का मुद्दा जानसन के साथ उठाएं।
बृहस्पतिवार को पेश किए गए विश्लेषण दस्तावेजों में एनआरएआई प्रमुख ने पिछले साल की तरह बहिष्कार की मांग नहीं की लेकिन मोदी से अपील की कि वे इस मुद्दे को उठाएं। रानिंदर ने कहा, ‘हम एक बार फिर हमारे प्रधानमंत्री मोदी की तरफ देख रहे हैं कि वे यह मुद्दा जितना जल्दी संभव हो ब्रिटेन के अपने समकक्ष बोरिस जानसन के साथ द्विपक्षीय तौर पर उठाएं। मोदी ने इसी तरह की पहल की थी जब राज्यवर्धन सिंह राठौड़ खेल मंत्री थे। आपने लंदन दौरे के दौरान द्विपक्षीय चर्चाओं के दौरान यह मुद्दा उठाया था और तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री (टेरेसा मे) इस मामले पर गौर करने के लिए राजी हो गईं थी।’
उन्होंने साथ ही कहा कि आईओए और खेल मंत्रालय को भी अपने समकक्षों के साथ खेल को दोबारा शामिल कराने का मुद्दा उठाना चाहिए। निशानेबाजी को हटाने का भारत ही नहीं बल्कि उसके पड़ोसी देशों बांग्लादेश और श्रीलंका पर भी बड़ा असर पड़ेगा। भारत को ऐसी स्थिति में 24 से 27 प्रतिशत पदक गंवाने होंगे जो वह अन्यथा जीतता। श्रीलंका पर भी दीर्घकाल में इसका असर (15 प्रतिशत) पड़ेगा। निशानेबाजी के बिना बांग्लादेश अपने शत प्रतिशत पदक गंवा देगा।