रियो पैरालंपिक में पदक जीतने के बाद कैंसर से जूझ रहे दीपा मलिक के पिता एक ही सपना देखते थे। अपनी दिव्यांग बेटी के गले में देश के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न का हार पड़ा होना। बीते वर्ष 30 अप्रैल को इस सम्मान के आवेदन की अंतिम तिथि थी और वह अपने हाथों से दीपा के आवेदन की फाइल तैयार कर रहे थे। दीपा के मुताबिक उन्होंने कई बार इस आवेदन की भाषा बदली और अंत में इसे भेज दिया। यह आवेदन भेजने के बाद ही इसी दिन उन्होंने अंतिम सांस ली। यही कारण है कि दीपा मलिक राजीव गांधी खेल रत्न सम्मान अपने पिता को समर्पित कर रही हैं। दीपा ने अमर उजाला से कहा कि उनके पिता की जुबां पर अंतिम शब्द यही थे कि उन्हें खेल रत्न जरूर मिलेगा। उनके जीते जी तो यह सपना पूरा नहीं हुआ, लेकिन यह सम्मान उनकी आत्मा को जरूर शांति पहुंचाएगा।