दुती कहती हैं, 'हैदराबाद में गोपीचंद एकेडमी में तैयारी करने का मुझे बहुत हुआ। गोपीचंद एकेडमी में की ट्रेनिंग मेरे लिए बहुत 'भाग्यशाली' रही। जब जब मैंने वहां बड़े मुकाबले के लए ट्रेनिंग की मैं पदक जीतने में कामयाब रही। मैंने बचपन में बहुत अभाव झेले। मेरी बड़ी बहन सरस्वती चंद जो खुद 800 मीटर की धाविका रही उन्होंने ही मुझे दौडने के प्रेरित किया। बचपन में सरस्वती मुझसे कहती थी कि दौड़ेगी तो तुम पदक जितोगी और इससे तुम्हारा और देश का नाम होगा। उन्हीं की सलाह पर मैंने हैदराबाद में गाचीबाउली में एथलेटिक्स कोच नगापुरी रमेश के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग की और यहां तक पहुंचने में कामयाब रही। एक रोचक बात बताती हूं आप यदि आम का पेड़ लगाते हैं और उसे सही समय पर खाद पानी देते हैं तो उस पर अच्छा फल आता है। यही बात एथलीट पर बहुत हद तक लागू होती है। यदि एथलीट को सही और अच्छी ट्रेनिंग के साथ जरूरी मार्गदर्शन और कोचिंग मिलता है तो जरूर बड़े मंच पर भी कामयाबी हासिल करता है। मैं इसी दर्शन को जेहन में रखकर खुद को अगले ओलंपिक के लिए तैयार कर रही हूं।'
दुती कहती हैं, 'मैं ओडिशा सरकार, केआईआईटीए केआईएसएस और भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) की आभारी हूं। इन सभी ने मुझ बतौर एथलेटिक्स हर सुविधा मुहैया कराई। बैंकॉक एशियाई खेलों में मेरे 100 और 200 मीटर की दौड़ में रजत पदक जीतने पर ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक डेढ़-डेढ़ करोड़ (कुल तीन करोड़ रुपये ) का इनाम देने की घोषणा मुझे आगे बड़ी एथलेटिक्स स्पद्र्धाओं बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगी। मैं बराबर मेहनत कर शानदार प्रदर्शन कर ओलंपिक खेलों में बेहतर प्रदर्शन करना चाहती हूं। अब ओडिशा सरकार ने मेरी ओलंपिक की तैयारी के लिए सभी तरह की ट्रेनिंग और कहीं भी आने जाने सहित पूरा खर्चा उठाने का फैसला है। इससे मैं बेफिक्र हो इन खेलों के लिए तैयारी कर पदक जीतने के लिए बेहतर स्थिति में हूंगी।