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'मैंने एशियाड में एक पदक जीतने का सपना बुना, देशवासियों की दुआओं से झोली में दूसरा पदक भी आया'

Sat, 01 Sep 2018 05:47 AM IST
सत्येन्द्र पाल सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली
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dutee chand
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ओडिशा के गांव चक गोपालपुर के बुनकर चक्रधर चंद की 22 वर्षीया बेटी एथलीट दुती चंद ने जकार्ता एशियाई खेलों में 100 मीटर की फर्राटा दौड़ में पदक जीतने का सपना बुना और अपने संकल्प और भरोसे से इसे पूरा करने में भी कामयाब रही।

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दुती चंद ने 'अमर उजाला' से शुक्रवार को कहा, 'मैंने एशियाई खेलों में 100 मीटर की दौड़ की पदक जीतने का सपना बुना और अपने से लंबी बहरीन की ओदियोंग एदिदियांग से फोटो फिनिश में पिछडने के बावजूद 11.32 सेकंड में यह दौड़ पूरी कर रजत जीतने में सफल रहीं। यह पदक मैंने अपने परिवार और कोच नगापुरी रमेश की दुआओं से जीता। हकीकत यह है कि मैंने एशियाई खेलों में एक पदक की आस की थी लेकिन भारतवासियों की दुआओं से मेरी झोली में दूसरा पदक  भी आया। देशवासियों की दुआओं से मैं 200 मीटर की दौड़ 23.20 सेकंड में पूरी कर इसमें भी रजत पदक जीतने में सफल रही। 100 और 200 मीटर की फर्राटा दौड़ बहुत तकनीकी दौड़ होती हैं और इसके लिए एथलीट को पूरा फोकस रहने पर पदक नसीब होता है।' 

उन्होंने कहा, 'मेरी लंबाई अन्य फर्राटा धाविकाओं से कम है लेकिन मैं इसकी भरपाई अपने तेज कदमों से पूरी कर लेती हैं। मैं फर्राटा दौड़ में चेस्ट प्रेस (गर्दन के साथ फिनिश लाइन पर शरीर को आगे करना) को बेहतर करने पर मेहनत करुंगी। मैं अपनी कम लंबाई को फर्राटा दौड़ में अपने लिए बाधा नहीं मानती हूं। लंबी धाविकाओं को स्टार्ट लेने में दिक्कत आती है लेकिन वे फिनिश बेहतर ढंग से करते हैं। हर धाविका के बाद अपने पास कुछ खास होता है। मेरा फोकस और लक्ष्य है अब ओलंपिक के लिए बाकी बचे दो बरस में बराबर अपनी फिटनेस पर मेहनत करना  वहां बड़े मंच पर पदक जीतने की तैयारी पर है। एशियाड में मिले दो रजत पदक मुझे ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन करने को प्रेरित करेंगे। आईएएएफ  की हाइप्रनड्रोजेनिज्म (पुरुषत्व के लक्ष्ण) की पॉलिसी के चलते मैंने बहुत तनाव झेला। यह बहुत मुश्किल घड़ी थी लेकिन इसमें कलिंगा इंस्टिटयूट ऑफ इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग (केआईआईटी) और कलिंग इंस्टिटयूट ऑफ सोशल साइंस (केआईएसएस) यूनिवर्सिटी के  संस्थापक प्रोफेसर अच्युत सामंत ने इन चुनौतियों से निपटने में मेरी जो  मदद की, उससे ही मैं यहां तक पहुंच पाई। मैं इसी यूनिवर्सिटी की छात्रा भी हूं।' 

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गोपीचंद एकेडमी में की ट्रेनिंग मेरे लिए बहुत 'भाग्यशाली' रही

dutee chand
दुती कहती हैं, 'हैदराबाद में गोपीचंद एकेडमी में तैयारी करने का मुझे बहुत हुआ। गोपीचंद एकेडमी में की ट्रेनिंग मेरे लिए बहुत 'भाग्यशाली' रही। जब जब मैंने वहां बड़े मुकाबले के लए ट्रेनिंग की मैं पदक जीतने में कामयाब रही। मैंने बचपन में बहुत अभाव झेले। मेरी बड़ी बहन सरस्वती चंद जो खुद 800 मीटर की धाविका रही उन्होंने ही मुझे दौडने के प्रेरित किया। बचपन में सरस्वती मुझसे कहती थी कि दौड़ेगी तो तुम पदक जितोगी और इससे तुम्हारा और देश का नाम होगा। उन्हीं की सलाह पर मैंने हैदराबाद में गाचीबाउली में एथलेटिक्स कोच नगापुरी रमेश के मार्गदर्शन में ट्रेनिंग की और यहां तक पहुंचने में कामयाब रही। एक रोचक बात बताती हूं आप यदि आम का पेड़ लगाते हैं और उसे सही समय पर खाद पानी देते हैं तो उस पर अच्छा फल आता है। यही बात एथलीट पर बहुत हद तक लागू होती है। यदि एथलीट को सही और अच्छी ट्रेनिंग के साथ जरूरी मार्गदर्शन और कोचिंग मिलता है तो जरूर बड़े मंच पर भी कामयाबी हासिल करता है। मैं इसी दर्शन को जेहन में रखकर खुद को अगले ओलंपिक के लिए तैयार कर रही हूं।' 
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ओडिशा सरकार,केआईआईटी और केआईएसएस की बहुत आभारी हूं : दुती

dutee chand - फोटो : PTI
दुती कहती हैं, 'मैं ओडिशा सरकार, केआईआईटीए केआईएसएस और भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) की आभारी हूं। इन सभी ने मुझ बतौर एथलेटिक्स हर सुविधा मुहैया कराई। बैंकॉक एशियाई खेलों में मेरे 100 और 200 मीटर की दौड़ में रजत पदक जीतने पर ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक डेढ़-डेढ़ करोड़ (कुल तीन करोड़ रुपये ) का इनाम देने की घोषणा मुझे आगे बड़ी एथलेटिक्स स्पद्र्धाओं बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगी। मैं बराबर मेहनत कर शानदार प्रदर्शन कर ओलंपिक खेलों में बेहतर प्रदर्शन करना चाहती हूं। अब ओडिशा सरकार ने मेरी ओलंपिक की तैयारी के लिए सभी तरह की ट्रेनिंग और कहीं भी आने जाने सहित पूरा खर्चा उठाने का फैसला है। इससे मैं बेफिक्र हो इन खेलों के लिए तैयारी कर पदक जीतने के लिए बेहतर स्थिति में हूंगी। 
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