दुनिया की सबसे ऊंची और एशिया की एकमात्र स्नो मैराथन लाहौल का चौथा संस्करण 23 मार्च को लाहौल-स्पीति के सिस्सू में होगा। लगभग 11 हजार फीट की ऊंचाई पर आयोजित होने वाला यह अनूठा आयोजन लंबी दूरी के रनर्स और अल्ट्रा रनर्स को चुनौती देता रहा है।
इस वर्ष मैराथन में देशभर से 300 से भी अधिक प्रतिभागी भाग ले रहे हैं, जो चार श्रेणियों-42 किलोमीटर (फुल मैराथन), 21 किलोमीटर (हाफ मैराथन), दस किलोमीटर और पांच किलोमीटर में एक-दूसरे को टक्कर देंगे। यह आयोजन टॉप एंड्योरेंस एथलीट्स और एडवेंचर प्रेमियों को आकर्षित कर हाई एल्टीट्यूट स्नो मैराथन में भारत को ग्लोबल पहचान प्रदान करवा रहा है।
आर्मी एवियेटर और स्नो मैराथन के इंवेंट चीफ कर्नल अरुण नटराजन ने इस आयोजन के पर्यावरणीय महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि लाहौल का विंटर वंडरलैंड रनर्स और एडवेंचर प्रेमियों के लिये रोमांचक अनुभव प्रदान करता है। इवेंट के संस्थापक और हिमालय संरक्षणवादी गौरव शिमर ने मैराथन के पर्यावरण संदेश पर बल दिया। उन्होंने बताया कि आयोजन का उद्देश्य हिमालय और ट्रांस हिमालयी क्षेत्र के सामने आने वाली पारिस्थितिक चुनौतियों को उजागर करना है।
सैन्य बलों के जवान भी लेंगे भाग
स्नो मैराथन के पिछले एडीशंस में इंडियन आर्मी और इंडियन नेवी की व्यापक भागीदारी देखने को मिलती रही है। इस वर्ष इंडियन एयरफोर्स के 20 जवान इस चुनौती को स्वीकार कर रहे हैं। इंडियन आर्मी लद्दाख स्काउट्स, डोगरा और कुमाऊं रेजीमेंट के एथलीटों सहित 25 टॉप रनर्स को स्नो मैराथन में भाग लेंगे। इसके अतिरिक्त आईटीबीपी और एसएसबी जैसे पैरा मिलिट्री फोर्स अपने रनर्स और आउटडोर एथलीटों के साथ अन्य को कंपीटिशन देंगी।