उत्तराखंड चतुर्थ राज्य ओलंपिक खेलों में भाग लेने के लिए बृहस्पतिवार को खिलाड़ी पहुंचे। ऐन वक्त पर खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था नहीं होने के कारण खेल शुरू होने से पहले ही तैयारियों की पोल खुल गई। रुद्रपुर पहुंचे खिलाड़ियों को स्टेडियम के बरामदे और पुलिस लाइन के खुले मैदान में सोकर थकान मिटानी पड़ी। वहीं ठहरने की व्यवस्था प्रभावित होने के कारण एसोसिएशन पदाधिकारियों ने अब खिलाड़ियों को दो शिफ्टों में बुलाने का निर्णय लिया है।
रुद्रपुर स्टेडियम की तैयारियों को लेकर शुक्रवार दोपहर एसोसिएशन महासचिव डीके सिंह, एडीएम जगदीश कांडपाल, बीईओ रवि मेहता ने मैदान का निरीक्षण किया। खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था न हो पाने के कारण पुलिस लाइन और रुद्रपुर स्टेडियम के बरामदे में सुस्ताते नजर आये। देहरादून और उत्तरकाशी से आए बाक्सिंग खेल के खिलाड़ियों को स्टेडियम के बरामदे में दिन गुजारना पड़ा।
एसोसिएशन के महासचिव डीके सिंह ने बताया कि 10 से 13 नवंबर तक होने वाले चतुर्थ उत्तराखंड राज्य ओलंपिक खेलों में प्रतिभाग करने वाले करीब पांच हजार खिलाड़ियों की रहने की व्यवस्था राधास्वामी सत्संग भवन में होनी थी। लेकिन, ऐन वक्त पर राधास्वामी सत्संग भवन के प्रबंधन ने खिलाड़ियों को ठहराने से इनकार कर दिया है। इस कारण महिला खिलाड़ियों की रहने की व्यवस्था किच्छा स्थित सूरजमल कॉलेज में की गई है। वहीं रुद्रपुर के जनता इंटर कालेज और गुरुद्वारे में पुरुष खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। वहीं फुटबाल खिलाड़ियों को 46वीं वाहिनी में ठहराया जाएगा। बताया कि ठहरने की व्यवस्था प्रभावित होने से अब खिलाड़ियों को दो शिफ्टों में बुलाया गया है।
देहरादून के मुक्केबाजों को आराम करने को मिला पतला सा गद्दा
खिलाड़ियों की रहने की व्यवस्था नहीं हो पाने के कारण खिलाड़ी काफी परेशान रहे। देहरादून के मुक्केबाजों को स्टेडियम के बैडमिंटन हॉल के आगे बरामदे में पड़े एक पतले से गद्दे में अपनी यात्रा की थकान मिटानी पड़ी। देहरादून से पहुंचे बॉक्सर हिमांशु सुलंकी ने कहा कि वह रात में यात्रा करके सुबह छह बजे स्टेडियम पहुंचे। जब उन्होंने जिला क्रीड़ाधिकारी रशिका सिद्दीकी से ठहरने की व्यवस्था के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि रहने की व्यवस्था उत्तरांचल ओलंपिक एसोसिएशन ने की है। ऐसा कहकर वह चली गई। बॉक्सिंग टीम मैनेजर विशाल सिंह ने यात्रा से सभी खिलाड़ी थके हुए हैं। थकान दूर न होने से उनका प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।
राज्य और जिला फुटबाल एसोसिएशन के टकराव से एक ही जिले की दो फुटबाल टीमें राज्य ओलंपिक खेलों में भेज दी गईं। जिला फुटबाल एसोसिएशन द्वारा चुनी गई टीम को राज्य ओलंपिक संघ ने प्रवेश देने से इनकार कर दिया। राज्य फुटबाल एसोसिएशन की टीम को ओलंपिक खेलों में प्रवेश दे दिया गया है।
राज्य में सितंबर से फुटबाल एसोसिएशन के चुनाव को लेकर विवाद चल रहा था। अक्तूबर माह में फुटबाल संघ का रुद्रपुर में चुनाव हुआ था। आर्येंद्र शर्मा गुट ने चुनाव में पक्षपात का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। साथ ही इसकी शिकायत खेल निदेशालय से की। इस विवाद की छाया जिले के फुटबाल जिले के खिलाड़ियों पर पड़ना तय हो गया। राज्य फुटबाल संघ के सचिव आरिफ अली ने शिवालिक स्कूल में चार नवंबर को फुटबाल टीम के चयन के लिए ट्रायल कराया। छह नवंबर को टीम चुन ली गई।
इधर, जिला फुटबाल संघ के सचिव दिनेश बिष्ट ने पाल कालेज में छह नवंबर को ट्रायल कराया। फाइनल ट्रायल आठ को हुआ। आठ को जिला फुटबाल संघ ने टीम की घोषणा कर दी। शुक्रवार को दोनों टीमें रुद्रपुर स्थित आयोजन स्थल पर पहुंच गईं। जिला ओलंपिक संघ से मान्यता मिलने के कारण राज्य फुटबाल संघ की टीम को राज्य ओलंपिक खेलों में प्रवेश मिल गया। जिला ओलंपिक संघ से मान्यता नहीं होने के कारण जिले की टीम को राज्य ओलंपिक खेलों में शामिल होने से रोक दिया गया।
राज्य ओलंपिक खेलों के लिए राज्य फुटबाल संघ की टीम को प्रवेश मिल गया है। नियमानुसार हमारी टीम सही है।
- आरिफ अली, सचिव राज्य फुटबाल संघ
हमारी टीम को प्रवेश नहीं दिया गया है। राज्य ओलंपिक समिति से उनकी वार्ता हुई है वह रात में इस पर निर्णय लेंगे। मैं शनिवार को ही इस संबंध में ज्यादा जानकारी दे सकता हूं।
- दिनेश बिष्ट, सचिव, जिला फुटबाल संघ