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स्टेडियम में स्विमिंग पूल पड़े हैं बंद, कैसे अभ्यास करें तैराक

Sun, 04 Nov 2018 04:11 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ न्यूज
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पुरानी कहावत है कि अभ्यास आदमी को पूर्ण बनाता है। खेलों पर भी यह कहावत सटीक बैठती है। खिलाड़ी अभ्यास के जरिये खुद को तैयार करते हैं। वहीं, कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम के तैराक अभ्यास के अभाव में पिछड़ रहे हैं। यहां साल भर में केवल छह माह ही तरणताल खुलता है।

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सर्दी की दस्तक होते ही तरणताल बंद कर दिया जाता है और खिलाड़ियों का अभ्यास केवल फिजिकल तक सिमट जाता है। कई बार लर्निंग पूल के प्रस्ताव के सहारे अभ्यास की परंपरा को बढ़ाने का प्रयास हुआ। लेकिन प्रस्ताव फाइलों में दबकर रह गया।

स्टेडियम में हर साल एक अप्रैल को तरणताल तैराकी खिलाड़ियों के अभ्यास और प्रतियोगिताओं के लिए खुलता है। यहां सितंबर तक खिलाड़ी अभ्यास करते हैं। इसके बाद तरणताल बंद कर दिया जाता है। यह सिलसिला कई वर्षों से चला आ रहा है। खिलाड़ी घर लौट जाते हैं और यहां का स्टाफ अन्य कार्यों में लगा दिया जाता है। इस तरह तरणताल छह माह ही खुलता है। जिससे खिलाड़ी पूरी तरह अभ्यास करने में परेशानी का सामना कर रहे हैं। 
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तैराकी में भविष्य बनाने का सपना देखने वाले युवा स्टेडियम छोड़ देते हैं या फिर फिजिकल तक सीमित रह जाते हैं। कुछ साल पहले तैराकी को 12 माह चलाने के लिए लर्निंग स्वीमिंग पूल का प्रस्ताव तैयार किया गया था। अफसरों का मत था कि इससे नए तैराक तैयार करने का रास्ता तो साफ होगा। वहीं, साल भर अभ्यास की राह आसान होगी। हालांकि यह प्रस्ताव सिरे नहीं चढ़ा।

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नेशनल के लिए चाहिए छह घंटे का अभ्यास

एक तैराक को नेशनल चैंपियनशिप के लिए सुबह-शाम तीन-तीन घंटे के अभ्यास की जरूरत है। छह माह तक वह नियमित अभ्यास करता है। पूल बंद होते ही अभ्यास रुक जाता है। इसी तरह स्टेट लेबल के खिलाड़ी को भी प्रतिदिन तीन घंटे के अभ्यास की जरूरत है। दिल्ली के तालकटोरा इंडोर स्टेडियम और स्पोर्ट्स कॉलेज सैफई के तरणताल में तैराक साल भर अभ्यास करते हैं। 

खलती है कोच की कमी
स्टेडियम के ओलंपिक साइज पूल में केवल प्रशिक्षित तैराक ही अभ्यास के लिए पहुंचते हैं। हर साल काफी संख्या में यहां युवा तैराकी में प्रवेश के लिए आते हैं। लेकिन कोच उपलब्ध न होने के कारण उन्हें लौटा दिया जाता है।

बताया जाता है कि वर्ष 2008 में स्पोर्ट्स अफसर के रूप में यहां विश्वजीत बसाख को तैनात किया गया था। इसके बाद युवाओं का तैराकी में रुझान भी बढ़ा। मगर अगले साल ही उनका ट्रांसफर हो गया। तब से केवल लाइफ गार्ड के सहारे पूल का संचालन हो रहा है। 

रुझान दिखे तो विचार करें
इंडोर स्टेडियम में ही 12 महीने तैराकी अभ्यास की सुविधा मिलती है। एकमात्र दिल्ली में ही ऑल वेदर स्वीमिंग पूल उपलब्ध है। जहां तक स्टेडियम में व्यवस्था की बात है तो यहां तैराकी के प्रति युवाओं में रुझान कम रहा है। युवाओं में तैराकी के प्रति रुझान दिखे तो सरकार भी इस पर विचार करे। -आले हैदर, आरएसओ मेरठ

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