एक तैराक को नेशनल चैंपियनशिप के लिए सुबह-शाम तीन-तीन घंटे के अभ्यास की जरूरत है। छह माह तक वह नियमित अभ्यास करता है। पूल बंद होते ही अभ्यास रुक जाता है। इसी तरह स्टेट लेबल के खिलाड़ी को भी प्रतिदिन तीन घंटे के अभ्यास की जरूरत है। दिल्ली के तालकटोरा इंडोर स्टेडियम और स्पोर्ट्स कॉलेज सैफई के तरणताल में तैराक साल भर अभ्यास करते हैं।
खलती है कोच की कमी
स्टेडियम के ओलंपिक साइज पूल में केवल प्रशिक्षित तैराक ही अभ्यास के लिए पहुंचते हैं। हर साल काफी संख्या में यहां युवा तैराकी में प्रवेश के लिए आते हैं। लेकिन कोच उपलब्ध न होने के कारण उन्हें लौटा दिया जाता है।
बताया जाता है कि वर्ष 2008 में स्पोर्ट्स अफसर के रूप में यहां विश्वजीत बसाख को तैनात किया गया था। इसके बाद युवाओं का तैराकी में रुझान भी बढ़ा। मगर अगले साल ही उनका ट्रांसफर हो गया। तब से केवल लाइफ गार्ड के सहारे पूल का संचालन हो रहा है।
रुझान दिखे तो विचार करें
इंडोर स्टेडियम में ही 12 महीने तैराकी अभ्यास की सुविधा मिलती है। एकमात्र दिल्ली में ही ऑल वेदर स्वीमिंग पूल उपलब्ध है। जहां तक स्टेडियम में व्यवस्था की बात है तो यहां तैराकी के प्रति युवाओं में रुझान कम रहा है। युवाओं में तैराकी के प्रति रुझान दिखे तो सरकार भी इस पर विचार करे।
-आले हैदर, आरएसओ मेरठ
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