अभी तक आपने भारत के अक्षय, पाकिस्तान के गेंदबाज यासिर जन, हनीफ मोहम्मद और श्रीलंका के हसन तिलकरत्ने व कमिंडू मेंडिस के बारे में सुना होगा जो दोनों हाथों से गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं। पर, ऐसा ही हुनरमंद खिलाड़ी अभिषेक चंदेल कानपुर में भी है। अंतर इतना है कि अभिषेक आर्थिक तंगी के चलते अपने हुनर का प्रदर्शन सही मंच पर नहीं कर पा रहे हैं।
19 वर्षीय अभिषेक पनकी के सरायमीता गांव के रहने वाले हैं। वह दाएं हाथ से तेज गेंदबाजी के साथ ऑफ ब्रेक स्पिन गेंदबाजी करते हैं और बाएं हाथ के चाइनामैन और ऑर्थोडॉक्स स्पिनर भी हैं। यही नहीं अभिषेक बल्लेबाजी में भी माहिर हैं।
अभिषेक के पिता इंद्रपाल सिंह चंदेल मजदूरी करते हैं और मां नीलम सिंह गृहिणी हैं। अभिषेक अपना और अपनी दो छोटी बहनों की पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए रात में एक कंपनी के लिए चौकीदारी (सिक्योरिटी गार्ड) की नौकरी करते हैं और दिन में गांव के मैदान में गेंदबाजी की प्रैक्टिस करते हैं।
अभिषेक बताते हैं कि उन्हें शुरू से ही क्रिकेट खेलने का शौक रहा है। 12 साल की उम्र से ही वह गांव के मैदान में अपना हुनर दिखाने लगे थे। किसी तरह 2015 में केडीएमए पहुंचे जहां अंडर-14 लीग के लिए खिलाड़ी लिए जा रहे थे। ड्रेस थी नहीं इसलिए सफेद शर्ट-पैंट पहनकर गए।
वहां टीम में उनका चयन हो गया। केडीएमए क्रिकेट लीग भी खेला और तेज गेंदबाजी करते हुए तीन ओवर में 21 रन देकर दो विकेट लिए थे। इसके अलावा 2017 में कानपुर प्रीमियर लीग भी वह एसएस स्पोर्ट्स अर्मापुर की तरफ से खेल चुके हैं। तब चार ओवर में 17 रन देकर तीन विकेट लिए थे। 2018 में इसी टूर्नामेंट में उन्होंने चार मैचों में 14 ओवर गेंदबाजी की थी और नौ विकेट लिए थे।
स्कॉलरशिप के लिए लखनऊ में ट्रायल दिया
अभिषेक बताते हैं कि इसी साल 16 मई को उन्होंने लखनऊ के रेलवे ग्राउंड में गौतम गंभीर की ओर से दी जाने वाली फंगेज क्रिकेट स्कॉलरशिप के लिए ट्रायल दिया था। सेलेक्टर्स ने उनसे दोनों हाथों से गेंदबाजी कराई। वीडियो भी बनवाया है। अभिषेक का पूरा विश्वास है कि वह इस स्कॉलरशिप के लिए चयनित हो जाएंगे। बताते हैं कि कानपुर में भी उन्होंने दो बार स्टेट ट्रायल देने की कोशिश की लेकिन कुछ नहीं हुआ।