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क्रांतिधरा पर तैयार होगी हॉकी की पौध, साढ़े 4 करोड़ से खोया मुकाम हासिल करेगा खेल

Sat, 06 Oct 2018 05:24 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ न्यूज - फोटो : अमर उजाला
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मेरठ में हाकी के अस्तित्व पर सालों से छाये संकट के बादल अब छटने की उम्मीद बंधी है। कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में एस्ट्रोटर्फ निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। सब कुछ ठीक रहा तो फिर एक बार हॉकी के नए खिलाड़ी यहां तैयार हो सकेंगे और क्रिकेट के बाद देश को हॉकी में भी नवोदित प्रतिभाएं यहां से मिल सकेंगी। 

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मेरठ से हॉकी का पुराना नाता रहा है। एक समय हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले मेजर ध्यान चंद भी यहां अभ्यास किया करते थे। शायद उसका ही असर था कि 70 और 80 के दशक तक आते-आते हॉकी का शहर के मैदानों पर कब्जा हो गया। एक के बाद एक लोकल हॉकी क्लब बनते चले गए और हॉकी हर दिल पर छा गई।

इसी दौरान प्रवीण कुमार शर्मा, रोमियो जेम्स, एमपी सिंह, विवेक सिंह, सुबोध खांडेकर, कुलदीप सिंह, राजेश चौहान, रियाजुद्दीन, गुरविंदर सिंह, सचिन खत्री सरीखे खिलाड़ी सामने आए और विश्व फलक पर क्रांतिधरा का नाम गूंजने लगा। मगर जल्द ही शहर की हॉकी को नजर भी लग गई।
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स्टेडियम में हॉस्टल का आगमन क्या हुआ, लोकल हॉकी खत्म होने लगी। लोकल क्लबों के खत्म होते ही हॉस्टल भी छिन गया। तब से लेकर आज तक हॉकी संघर्ष करने को मजबूर है। हॉकी में खिलाड़ी तैयार तो हुए, मगर अत्याधुनिक सुविधाओं से वंचित होने के कारण बेहतर परिणाम नहीं मिल सके। घास के मैदान पर खिलाड़ियों की प्रतिभा उलझकर रह गयी। जब शहर को एस्ट्रोटर्फ का तोहफा मिला है तो फिर हॉकी में बदलाव की उम्मीद जगी है।

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साढे़ चार करोड़ होंगे खर्च

एस्ट्रोटर्फ के काम पर यहां साढ़े चार करोड़ रुपये खर्च होेंगे। इसके लिए डेढ़ करोड़ रुपये की पहली किश्त जारी हो चुकी है। इस रकम से काम  शुरू कर दिया गया है। जल्द ही दूसरी किश्त भी जारी होने की बात कही जा रही है।
हॉकी पर बहार, क्रिकेट पर छाया संकट
मेरठ में वर्ष 1974 में हॉकी हॉस्टल का पदार्पण हुआ था। इस दौरान शहर से हॉकी खिलाड़ियों की बड़ी खेप तैयार हुई। समय बदलता गया और हॉकी एस्ट्रोटर्फ की जरुरत महसूस होने लगी। काफी हद तक मेरठ को एस्ट्रोटर्फ मिलने की उम्मीद भी बंध गई। मगर वर्ष 1999 और 2000 में राजनीतिक उठापटक के बीच हॉस्टल मेरठ के हाथ से खिसक गया।

केवल यही नहीं जिस एस्ट्रोटर्फ के मिलने की उम्मीद मेरठ को थी, वह भी रामपुर की झोली में चला गया। तब से मांग कई बार उठी, मगर पूरी नहीं हो सकी। स्टेडियम में हॉकी एस्ट्रोटर्फ का काम तेजी से चल रहा है। आने वाले कुछ माह में यह बनकर तैयार भी हो जाएगा। मगर इसके निर्माण के बाद स्टेडियम में खेली जा रही क्रिकेट पर संकट के बादल मंडराते दिख रहे हैं। क्रिकेट मैच के लिहाज से मैदान नाकाफी है। ऐसे में स्टेडियम से क्रिकेट हॉस्टल खत्म होने की आशंका भी बढ़ गई है। 

एस्ट्रोटर्फ मेरठ का सालों पुराना ख्वाब है, जो पूरा होने जा रहा है। निश्चित तौर पर परिणाम बदलेंगे और हॉकी की दशा भी सुधरेगी। मगर यह तब ही संभव हो सकेगा, जब लोकल खिलाड़ियों को भी एस्ट्रोटर्फ का लाभ मिले।
-प्रवीण शर्मा, पूर्व हॉकी खिलाड़ी

घास और एस्ट्रोटर्फ की हॉकी में फर्क है। युवा खिलाड़ी अगर एस्ट्रोटर्फ से तैयार होंगे तो इसका लाभ भविष्य में मिलेगा। अब हॉकी को वास्तविक मुकाम हासिल कराने के लिए स्कूल स्तर पर भी बढ़ावा देना होगा।
-सुनील चौधरी, हॉकी कोच, स्पोर्ट्स स्टेडियम

शहर को एस्ट्रोटर्फ मिला है, यह बेहद खुशी की बात है। मगर खिलाड़ियों को वास्तविक खुशी तब मिलेगी, जब उन्हें इस पर खेलने दिया जाएगा। वर्तमान में हॉकी के हालात क्या हैं, यह किसी से छिपे नहीं हैं।
-प्रदीप चिन्यौटी, हॉकी कोच, एनएएस कॉलेज
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