एक तरफ सरकार खेलों को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे करती है, दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण और रजत पदक जीतने वाले खिलाड़ियों की अनदेखी की जा रही है। हालात ऐसे हैं कि इन खिलाड़ियों को दोबारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतने की तैयारी के लिए चंदा मांगना पड़ रहा है। वे धर्मशाला में समाजसेवी संजय शर्मा के साथ दुकानों में जाकर चंदा जुटा रही हैं।
धर्मशाला में प्रेसवार्ता के दौरान कुछ ऐसा ही खुलासा ज्वाली क्षेत्र की महिला खिलाड़ियों ने किया है। उन्होंने कहा कि भूटान में हुई साउथ एशियन ग्रैपलिंग चैंपियनशिप में देश के लिए स्वर्ण और रजत पदक जीतने के बावजूद उनकी सुध नहीं ली गई। न तो सरकार उन्हें मूलभूत सुविधाएं दे पाई और न ही स्थानीय विधायक मदद के लिए आगे आए। प्रेसवार्ता में अर्जुन, दीक्षा, काजल, रीना और प्रियंका के साथ विशेष खिलाड़ी अभिलाष भी मौजूद रहे।
ग्रैपलिंग, ग्रासलिन और ताईक्वांडो की खिलाड़ियों ने दावा किया कि इनका चयन 19 सितंबर से कजाकिस्तान में होने वर्ल्ड ग्रैपलिंग चैंपियनशिप के लिए हुआ है, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते अभ्यास के लिए पूरी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। उन्होंने बताया कि भूटान में हुई ओपन चैलेंज गेम्स में देश के लिए स्वर्ण और रजत पदक जीत चुकी हैं। सरकार से लेकर स्थानीय विधायक से भी मदद की गुहार लगाई गई, लेकिन कहीं से कोई सहायता नहीं मिली।