कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में अजय सिंह ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन वो देश को सातवां पदक दिलाने से चूक गए। वेटलिफ्टिंग में 25 साल के अजय सिंह ने कुल 319 किलोग्राम वजन उठाया, लेकिन वो पदक नहीं दिला पाए। पुरुषों के 81 किलोग्राम वर्ग में वो चौथे स्थान पर रहे। अजय ने स्नैच में 143 और क्लीन एंड जर्क में 176 किलोग्राम भार उठाया। खास बात यह है कि भारत ने अब तक इस इवेंट में छह पदक जीते हैं और सभी वेटलिफ्टिंग में ही आए हैं। यहां हम बता रहे हैं कि देश को सातवां पदक दिलाने से चूकने वाले अजय सिंह कौन हैं और वेटलिफ्टिंग में उनका सफर कैसे शुरू हुआ।
अजय ने 2021 में ताशकंद उज्बेकिस्तान में आयोजित कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीता था। उन्होंने 81 किलो भार वर्ग में कुल 322 किलो वजन उठाया था इसी प्रदर्शन के आधार पर उन्हें बर्मिंघम कॉमनवेल्थ में जगह मिली थी।
एक महीने पहले ही पहुंच गए बर्मिंघम
कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 की शुरुआत से एक महीने पहले ही अजय बर्मिंघम पहुंच गए थे। वहां उन्होंने अपने कोच के निर्देशन में तैयारी शुरू कर दी थी। इसी का नतीजा है कि उन्होंने अब देश को पदक दिलाया है। अजय के लिए यहां तक का सफर इतना आसान नहीं रहा है। वो लगभग एक दशक से तैयारी कर रहे हैं। हालांकि, इस बार वो पदक से चूक गए, लेकिन आने वाली प्रतियोगिताओं में उनसे पदक की उम्मीद होगी।
नौ साल की उम्र में शुरू की थी वेटलिफ्टिंग
राजस्थान के झुंझुनूं जिले के रहने वाले अजय सिंह शेखावत ने महज नौ साल की उम्र में ही वेटलिफ्टिंग शुरू कर दी थी। उन्होंने शुरुआत से ही काफी प्रभावी प्रदर्शन किया था। इसी वजह से उनका चयन आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट पुणे में हो गया। इसके बाद से वो यहीं ट्रेनिंग कर रहे हैं। अजय सिंह भारतीय सेना में राजपूताना राइफल्स का हिस्सा भी हैं। अजय सिंह के पिता भी आर्मी में सूबेदार रहे हैं।
अजय ने 2011 से 2014 तक लगातार राज्य स्तर की प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीता। 2015 यूथ कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक और सीनियर नेशनल वेट लिफ्टिंग स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। 2016 साउथ एशियन गेम्स की 77 किलोग्राम कैटेगरी में उन्होंने 305 किलो वजन उठाकर स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद साल 2017 में उन्हें महाराणा प्रताप पुरस्कार से नवाजा गया। वह अब तक छह अंतरराष्ट्रीय पदक जीत चुके हैं।