आदिल अल्ताफ अपने गरीब दर्जी पिता को श्रीनगर के लाल बाजार में रोजाना साइकल से छोड़ने और लाने जाते थे। मौका मिलता तो भीड़ भरे लाल बाजार की पटरियों पर साइकल चलाने का कोई मौका नहीं छोड़ते। उनके इसी जुनून ने खेलो इंडिया यूथ गेम्स में जम्मू कश्मीर को साइकलिंग का पहला स्वर्ण दिलाया। आदिल ने 70 किलोमीटर रोड रेस में स्वर्ण जीता। इससे पहले आदिल ने 28 किलोमीटर टाइम ट्रायल (व्यक्तिगत) में भी रजत जीता था।
पिता को रोजाना छोड़ने और लाने के दौरान ही आदिल को साइकलिंग का शौक लग गया। 15 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार अपने स्कूल कश्मीर हार्वर्ड में साइकलिंग का कंपटीशन खेला। इसके ही उन्होंने साइकलिंग को खेलों के रूप में गंभीरता से लेना शुरू किया। उनके पिता ने बेटे को अच्छी साइकल दिलाने के लिए दर्जी के काम में दोहरी मेहनत शुरू कर दी।
जब आदिल ने स्थानीय स्तर पर साइकलिंग के कंपटीशन जीतना शुरू किए तो एसबीआई ने उन्हें साढ़े चार लाख रुपये की एमटीबी बाइक साइकल दिलाई। आदिल पिछले छह माह से आदिल एनआईएस पटियाला में खेलो इंडिया यूथ गेम्स की तैयारियां कर रहे हैं।