भारत को एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक दिलाने वाले जीतू राय का बचपन नेपाल में गरीबी में बीता।
वरिष्ठ खेल पत्रकार नौरिस प्रीतम से बातचीत में उन्होंने कई बातें साझा कीं। जीतू ने कहा, "मुझे बचपन में पढ़ने का समय नहीं मिलता था। मैं भाग-भाग कर नौ बजे स्कूल पहुंचता था। हालांकि वहां पहुंच कर टाइम पास करता था क्योंकि ये पता नहीं था कि कैसे पढ़ना है।"
भारत के इस नए दिग्गज निशानेबाज ने आगे कहा, "जब मैं घर वापस आता था तो मां बोलती थी कि घर में पड़ा बासी भात खाकर भैंस या बकरी चराने चले जाओ। जीतू ने एशियाड में गोल्ड मेडल जीतने से पहले ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भी गोल्ड मेडल जीता था। साथ ही वह पिछले दिनों रियो ओलंपिक 2016 के लिए भी टिकट कटाने में कामयाब हो गए हैं।
ब्रिटिश आर्मी की बजाए भारतीय सेना से जुड़ा
जीतू राय ने अपने बचपन के बारे में बताया, "मेरा जन्म नेपाल में हुआ और मेरी इच्छा थी कि मैं गोरखा रेजीमेंट ज्वाइन करूं। इसलिए मैं भर्ती होने भारत आ गया। मैंने सोचा था कि ब्रिटिश आर्मी ज्वाइन करूंगा, लेकिन उसकी भर्ती एक दिन बाद होने वाली थी इसलिए सोचा पहले भारतीय आर्मी में ही कोशिश कर लूं।"
उन्होंने कहा, "मैं पहले ट्रायल में ही भारतीय आर्मी में चयनित हो गया तो इसी में सेवा जारी रखी। मैंने कभी इस मुकाम के बारे में नहीं सोचा था, मेरे लिए तो गोरखा रेजीमेंट में भर्ती होना ही काफी था।"
जीतू ने कहा, "एशियाई खेलों में तो गोल्ड मेडल जीत लिया है। अब आने वाले वर्ल्ड कप और रियो ओलंपिक में अच्छा प्रदर्शन करना चाहता हूं।"
जीतू राय ने शनिवार को एशियाई खेलों में 50 मीटर पिस्टल स्पर्धा में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया। इत्तेफाक यह है कि यही स्वर्ण अभी तक भारत का एकमात्र पीला तमगा बना हुआ है। भारत को दूसरे पीले तमगे का इंतजार अभी भी है।
'लखनऊ में घर खरीदने के बाद करूंगा शादी'
जीतू ने अपने भविष्य के बारे में बात करते हुए कहा, "उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से 50 लाख रुपए के ईनाम की घोषणा से मैं बहुत खुश हू। इससे मैं प्रेरित हुआ कि आगे भी अच्छा प्रदर्शन करूं।"
"मैं सोच रहा हैं कि इस पैसे से लखनऊ में जमीन खरीद लूं क्योंकि लखनऊ में मुझे रहना अच्छा लगता है। मैं लखनऊ में ट्रेनिंग करके ही यहां तक पहुंचा हूं। शादी के बारे में मैंने अभी नहीं सोचा है।"
"इस पदक के बाद ओलंपिक में पदक जीतना भी मेरा कर्तव्य है। इसे मुझे निभाना पड़ेगा। और मुझे ऐसा नहीं लगता है कि पदक जितने के बाद मेरा भाव बढ़ गया है। मैं जैसा था वैसा ही हूं।"