एफआईएच भले ही हॉकी में पुराने दिनों की साख को भुनाने के लिए भारत पर मेहरबान होकर बड़े से बड़े टूर्नामेंटों की बरसात कर दे। लेकिन एक बात तय लग रही भारतीय हॉकी में कोई सुधार नहीं होने वाला है।
वर्ल्ड हॉकी लीग में मेजर ध्यानचंद स्टेडियम पर शुक्रवार को भारतीय टीम जब इंग्लैंड के खिलाफ अपने पहले मुकाबले में उतरी तो उसके पास मर्ज तो पुराना था लेकिन कोच टेरी वॉल्श के रूप में दवा नई थी। लेकिन यह मर्ज इतनी गहराई तक पहुंच चुका है कि वॉल्श नाम की दवा भी उस पर असर नहीं कर पा रही है।
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मुकाबला भले ही वर्ल्ड नंबर चार इंग्लैंड से था लेकिन एक उम्मीद कहीं न कहीं थी कि शायद कुछ अच्छा हो जाए। लेकिन यह उम्मीद भी बेमानी साबित हुई। इंग्लैंड ने आसानी से 2-0 से जीत हासिल की।
पूरे मैच में भारतीयों ने एक भी उल्लेखनीय मूव नहीं बनाया। हालांकि उसे चार पेनाल्टी कार्नर मिले। लेकिन एक भी गोल में नहीं बदला जा सका। जबकि उसके पास रूपिंदर पाल और रघुनाथ जैसे विशेषज्ञ हैं। इसके ठीक उलट इंग्लैंड को पांच पेनाल्टी कार्नर हासिल हुए और इनमें से दो उसने गोल में परिवर्तित किए।
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यह तो भला हो गोलकीपर पीआर श्रीजेश का जिन्होंने पीसी पर खूबसूरत बचाव कर गोलों की संख्या नहीं बढ़ने दी। श्रीजेश ने दो निश्चित गोलों को भी बचाया। जबकि भारत की ओर से हाल यह था कि चार में से दो पीसी को बीरेंद्र लाकड़ा रोक ही नहीं सके।
चौथे पीसी पर रूपिंदर ने गोल किया लेकिन लाकड़ा ने बॉल को डी के बाहर की बजाय अंदर ही रोक दिया। जिसे थर्ड अंपायर से बातचीत के बाद खारिज कर दिया गया। डिफेंस में इंग्लैंड को तीसरा पेनाल्टी कार्नर अनुभवी वी रघुनाथ की गलती के चलते मिला।
रघुनाथ ने 27वें मिनट में 25 गज की रेखा के अंदर पीछे से स्टिक लगाकर जिस तरह इंग्लिश खिलाड़ी को गिराया। उसे माफ नहीं किया जा सकता। इसी पीसी को एडम डिक्सन ने गोल में बदला।
जबकि 44वें मिनट में चौथे पीसी को भी एक बार फिर डिक्सन ने गोल में बदल कर इंग्लैंड की 2-0 से जीत पक्की कर दी।
पहले ही दिन हुआ उलटफेर
वर्ल्ड हॉकी लीग के पहले ही दिन बड़ा उलटफेर देखने को मिल गया। कहने को अर्जेंटीना भले ही पैन अमेरिकन चैंपियन हो लेकिन उसकी तुलना कभी नीदरलैंड जैसी चैंपियन टीम से नहीं की गई। लेकिन मेजर ध्यानचंद स्टेडियम पर शुक्रवार को इस दक्षिण अमेरिकी टीम ने नीदरलैंड को 5-2 के बड़े अंतर से धो दिया।
बेल्जियम ने ऑस्ट्रेलिया को खेल के 69वें मिनट तक 2-2 की बराबरी पर रोक कर रखा। लेकिन जैकब व्हीटन ने खेल समाप्त होने से एक मिनट पहले गोलकर ऑस्ट्रेलिया को 3-2 से रोमांचक जीत दिला दी।
जर्मनी ने शुरू से ही न्यूजीलैंड पर दबदबा बनाकर रखा। पहले हॉफ में जर्मनी 3-1 की बढ़त पर थी। दूसरे हॉफ में भी यही अंतर रहा और जर्मनी ने एकतरफा 6-1 से जीत हासिल की।