देश को तीन ओलंपिक में लगातार स्वर्ण पदक दिलाने वाले हॉकी के जादूगर ध्यानचंद ने अपने करियर में कई मैच जीते। लेकिन उन्हें जो मैच उनके पूरे जीवन में सर्वश्रेष्ठ लगा वह ओलंपिक का नहीं था। ध्यानचंद को 1933 में खेला गया बेइग्टन कप का फाइनल सबसे बेस्ट लगा। यह मैच कलकत्ता कस्टम और झांसी हीरोज के बीच खेला गया था। ध्यानचंद ने इस मैच के बारे में कहा था, 'अगर कोई मुझसे पूछे कि आपको अब तक सबसे बेस्ट मैच कौन सा लगा तो मैं बेझिझक 1933 के विघटन कप को अपना सबसे बेस्ट मैच कहूंगा'।
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यह मैच ध्यानचंद के सबसे यादगार रहा, इसकी कई वजह थीं। एक तो इस मैच में ध्यानचंद ने कोई भी गोल नहीं किया था। इस मैच को खेलकर वापसी में झांसी हीरोज यानी ध्यानचंद की टीम को ट्रेन की तीसरी श्रेणी के अनारक्षित डिब्बे में सफर करना पड़ा। इन दो वजहों से ध्यानचंद ने इस मैच को अपने करियर का सबसे बेस्ट मैच कहा।
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ध्यानचंद ने 1935 में न्यूजीलैंड ऑस्ट्रेलिया के दौरे में 43 मैच खेले गए, जिसमें भारत ने 584 गोल किए। इनमें से 201 गोल ध्यानचंद ने किए थे।
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