भारतीय हॉकी टीम के स्ट्राइकर ललित उपाध्याय पहले जांघ और फिर पीठ में चोट के कारण वह करीब पांच-छह महीने भारतीय हॉकी टीम और शिविर से बाहर रहे। इसी महीने के आखिर में बेल्जियम दौरे और नवंबर में भुवनेश्वर में होने वाले ओलंपिक हॉकी क्वॉलिफायर के लिए बेंगलुरू में चल रहे सीनियर शिविर के लिए हॉकी कोर ग्रुप के संभावितों में जगह बनाने के बाद अब वह फिर भारतीय टीम में जगह बनाने को बेताब हैं।
हॉकी कलाकार मोहम्मद शाहिद की नगरी बनारस से आने वाले 26 वर्षीय ललित उपाध्याय ने कहा कि, मैं भारतीय टीम के फिजियो और ट्रेनर की निगरानी में बेंगलुरू में रह कर अब अपनी जांघ और पीठ की चोट से उबर कर अपनी पूरी फिटनेस पा चुका हूं। मेरा यकीन अपनी मेहनत और कौशल पर है। टीम में चुनना चयनकर्ताओं का काम है। मेरा काम है अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है।
मैं यह जानता हूं कि किसी भी खिलाड़ी की भारतीय टीम में जगह पक्की नहीं है। जो निरंतर अच्छा प्रदर्शन करेगा वही टीम में रहेगा। हमारी टीम की ताकत है इसमें जूनियर और सीनियर खिलाडिय़ों के बीच बढिय़ा तालमेल। जहां तक मेरे हॉकी कौशल की बात है तो सीनियर टीम में अपने करीब एक दशक के अनुभव के साथ अब मैं इसका बेहतर ढंग से इस्तेमाल करना जान गया हूं।