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महिला हॉकी टीम की 'वॉल' : नौ गोल शॉट बचाकर भारत के लिए दीवार बनीं सविता, अफ्रीका के खिलाफ खराब डिफेंस से सबक लिया

Mon, 02 Aug 2021 07:34 PM IST
मुकेश कुमार झा स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ऐसा पहली बार है, जब भारत की महिला टीम ने ओलंपिक के सेमीफाइनल में जगह बनाई है। इस मैच में गुरजीत कौर ने एकमात्र गोल किया, लेकिन भारत की जीत गोलकीपर सविता पुनिया ने पक्की की।
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सविता पुनिया - फोटो : social media
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विस्तार
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भारतीय महिला हॉकी टीम ने टोक्यो ओलंपिक के सेमीफाइनल में जगह बना ली है। टीम इंडिया ने क्वार्टर फाइनल में ऑस्ट्रेलिया को 1-0 से हराया। ऐसा पहली बार है, जब भारत की महिला टीम ने ओलंपिक के सेमीफाइनल में जगह बनाई है। इस मैच में गुरजीत कौर ने एकमात्र गोल किया, लेकिन भारत की जीत गोलकीपर सविता पुनिया ने पक्की की। अपने शानदार प्रदर्शन के बाद सविता को 'ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया' कहा जा रहा है। उन्होंने इस मैच में नौ गोल शॉट बचाकर ऑस्ट्रेलिया को एक भी गोल नहीं करने दिया। इनमें सात पेनाल्टी कॉर्नर और दो फील्ड गोल के शॉट शामिल हैं।

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यहां डिफेंस की बात इसलिए जरूरी है, क्योंकि पूल राउंड के अपने आखिरी और करो या मरो के मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत का डिफेंस काफी कमजोर दिखा था। भारत ने इस मैच में चार गोल किए थे, लेकिन तीन गोल खाए भी थे। हर राउंड में अफ्रीकी टीम भारत की बढ़त को बराबर करने में कामयाब हो जा रही थी। ऐसे में तीन बार की ओलंपिक गोल्ड चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत ने उन गलतियों से सबक लिया और इतिहास रच दिया।

ऑस्ट्रेलिया के हाई कमिश्नर ने सविता को द ग्रेट वॉल बताया

भारत में ऑस्ट्रेलिया के हाई कमिश्नर बैरी ओ फैरेल ने टीम इंडिया को बधाई देते हुए सविता को द ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया के नाम से संबोधित किया। उन्होंने ट्वीट किया कि भारत की महिला हॉकी टीम ने ऑस्ट्रेलिया को हराते हुए पहली बार ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया है। कंगारू टीम और गोल के बीच में सविता पुनिया दीवार बनकर खड़ी रहीं। हमारी टीम उनसे पार नहीं पा सकीं।

मजबूत डिफेंस से ऑस्ट्रेलिया के हर प्रहार को नाकाम किया
भारत ने अपने पिछले मुकाबले से सबक लेते हुए ऑस्ट्रेलिया को वापसी का मौका नहीं दिया। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हाफ टाइम तक भारत 1-0 से आगे था। ऑस्ट्रेलियाई टीम गोल करने की हरसंभव कोशिश कर रही थी, लेकिन सविता और भारतीय डिफेंडरों के सामने वह कुछ न कर सकी। कंगारू टीम ने तीसरे क्वार्टर के शुरू में स्टीवर्ट ग्रेस के प्रयासों से मौका भी बनाया, लेकिन भारतीय गोलकीपर ने मारिया विलियम्स के शॉट को रोककर यह हमला नाकाम कर दिया। ऑस्ट्रेलिया ने इसके बाद दो पेनल्टी कार्नर हासिल किए, लेकिन सविता की अगुआई में भारतीय डिफेंडर्स मजबूती के साथ हर खतरे टालती रही।

हरियाणा की सविता ने 2008 में डेब्यू किया

हरियाणा की रहने वाली सविता पुनिया ने 2008 में अंतरराष्ट्रीय सर्किट पर अपनी शुरुआत की। सविता ने महज 17 साल की उम्र में जूनियर टीम में काफी संभावनाएं दिखाकर राष्ट्रीय टीम में जगह बना ली। 2013 में उन्होंने भारतीय महिला हॉकी टीम की तरफ से महिला एशिया कप में भाग लिया। इसके फाइनल में पुनिया ने पेनल्टी शूटआउट में दो महत्वपूर्ण गोल बचाए, जिससे भारत को कांस्य पदक जीतने में मदद मिली। सविता इंचियोन में 2014 एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतने वाली टीम का भी हिस्सा थीं। पुनिया ने 36 साल के लंबे अंतराल के बाद महिला टीम को रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

रोडवेज की बस से गोलकीपिंग किट लेकर सफर करती थीं सविता

2003 में जब सविता कोच सुंदर सिंह खरब के नेतृत्व में सिरसा में हरियाणा सरकार की हॉकी नर्सरी में शामिल हुई, तो वह अक्सर अपने गांव जोधका से हरियाणा रोडवेज की बसों में अपने गोलकीपिंग किट ले जाया करती थीं। वह अक्सर अपने पिता से शिकायत करती थीं कि बस कंडक्टर उसके किट को अपने पैरों से छू रहे हैं या दो किट की वजह से उसे बस में चढ़ने से मना कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर छाईं सविता
सविता की शानदार परफॉर्मेंस के बाद सोशल मीडिया पर फैंस खुशी से झूम उठे। फैंस ने उनकी तुलना पुरुष हॉकी टीम के गोलकीपर श्रीजेश से की। एक फैन ने लिखा कि ऑस्ट्रेलिया ने गोल करने की नौ बार कोशिश की, लेकिन सविता ने हर बार गोल बचाने में सफल रहीं। श्रीजेश अब आपको ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया का टाइटल सविता से शेयर करना पड़ेगा।

वहीं, एक फैन ने महिला और पुरुष टीम को सेमी फाइनल में पहुंचाने का श्रेय भी इन्हीं दोनों खिलाड़ियों को दिया। उन्होंने लिखा कि सविता पुनिया और पीआर श्रीजेश ने भारत की सेमी फाइनल बर्थ को पक्का करने में अहम योगदान दिया है।
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अब अर्जेंटीना से मुकाबला

फाइनल से पहले भारतीय टीम का सामना अर्जेंटीना से चार अगस्त को होगा। टीम के हालिया प्रदर्शन से 41 साल में पहली बार महिला हॉकी में पदक की उम्मीद जगी है। इसस पहले भारतीय टीम मास्को ओलंपिक 1980 में चौथे स्थान पर रही थी, लेकिन केवल छह टीमों ने हिस्सा लिया था और मैच राउंड रोबिन आधार पर खेले गए थे।
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