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सरदार सिंह ने खराब प्रदर्शन के लिए फैंस से मांगी माफी, बोले- साबित करेंगे हम हैं नंबर-1

Sun, 09 Sep 2018 01:58 AM IST
सत्येन्द्र पाल सिंह, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Sardar Singh
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भारत के अनुभवी सेंटर हाफ सरदार सिंह  सरदार कहते हैं कि जकार्ता एशियाई खेलों में हमारी टीम का आगाज बहुत बढ़िया रहा, लेकिन सेमीफाइनल एक अलग ही मैच होता।  सरदार ने 'अमर उजाला' से कहा, 'हमें बराबर मौके मिले, लेकिन हमें मौके गंवाने महंगे पड़े। हमारे हर खिलाड़ी ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया। हमने दो बार बढ़त ली, लेकिन खासतौर पर डेढ़ मिनट के बाकी रहते हमारी क्षणिक ढील हमारी हार का कारण बनी।' 

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उन्होंने आगे कहा, 'हम मौके गंवाने और क्षणिक ढील से भविष्य में बचना होगा। मलयेशिया भले ही बहुत फसाउ टीम है, जो शुरू में हमला बोलने की बजाय जवाबी हमलों पर ज्यादा भरोसा करती है। मलयेशिया  के हाथों हार के लिए कोई बहाना नहीं। चीफ कोच हरेन्द्र सर, क्या सीनियर, क्या जूनियर , सभी खिलाड़ियों की आंखें नम थी। ड्रेसिंग रूम में एकदम सन्नाटा था। हर कोई मायूस था। यह वाकई निराशाजनक नतीजा था। देश के हॉकी प्रेमियों के साथ खुद भारतीय टीम का हर खिलाड़ी एशियाई खेलों में सुनहरे तमगे की आस कर रहा था।' 

सरदार सिंह ने साथ ही कहा, 'मैं मलयेशिया के खिलाफ सेमीफाइनल में हार के लिए अपनी और भारतीय टीम की ओर से देश के हॉकी प्रेमियों से माफी मांगता हूं। हमें अफसोस है कि हम देशवासियों का सपना पूरा नहीं कर सके। हमारे पास अब ओमान में एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी में यह साबित करने का मौका है कि हम एशिया की नंबर एक टीम हैं। फिर नवंबर में भुवनेश्वर में ओडिशा पुरुष हॉकी विश्व कप है और इसमें हमें खुद को दुनिया की टीमों के सामने यह दिखाने और साबित करने का मौका होगा कि हम दुनिया की शीर्ष टीमों को टक्कर देने का माद्दा रखते हैं।' 
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बकौल सरदार, 'इन दोनों टूर्नामेंट में हम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर एशियाई खेलों की निराशा को दूर करने की कोशिश करेंगे। भारतीय हॉकी टीम पर भरोसा रखें वह भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करेगी और कसौटी पर खरी उतरेगी। भुवनेश्वर में शिविर में छोटी-छोटी गलतियों को दूर करने की पुरजोर कोशिश रहेगी।'

हमारे लिए विश्वास करना मुश्किल कि मलयेशिया से हार गए हैं: मनप्रीत

मनप्रीत सिंह
भारत के पूर्व कप्तान और अनुभवी आक्रामक सेंटर हाफ मनप्रीत सिंह कहते हैं कि मलयेशिया के खिलाफ सेमीफाइनल में हार से टीम में हर कोई सकते में था। वह कहते हैं, 'हमारे लिए इस पर विश्वास करना मुश्किल हो गया था कि हम सेमीफाइनल में हार गए हैं। दरअसल हमें इस हार का मलाल इसलिए कुछ ज्यादा था कि हमने इसके लिए तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। खैर टीम ने अपनी ताकत समेटी और पाकिस्तान के खिलाफ मैच में झोंक कर कांसा जीता और एशियाई खेलों से खाली हाथ आने से बच गए।'
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दिल अभी भी बार-बार कहता है, हमें सुनहरा तमगा जीतना चाहिए था :  आकाशदीप सिंह 

आकाशदीप सिंह
आक्रमण के सूत्रधार और गोल करने में माहिर भारत की पुरुष हॉकी टीम के यंग स्ट्राइकर आकाशदीप सिंह कहते हैं कि जकार्ता एशियाई खेलों में टीम की शुरुआत बहुत अच्छी रही, लेकिन यह बात सभी को हमेशा जेहन में रखनी होगी असली मुकाबले नॉकआउट क्वॉर्टर और सेमीफाइनल से शुरू होते हैं। 

आकाशदीप सिंह ने कहा, 'हमने एशियाई खेलों में  शानदार अंदाज में आगाज किया था। बदकिस्मती से मलयेशिया के खिलाफ अहम सेमीफाइनल में हम अपनी क्षमता का 40 फीसदी भी नहीं खेल पाए थे। इसके बावजूद हमें गोल करने के लिए खूब मौके मिले, हमने बढ़त भी बनाई। हमें गोल करने के मौकों को पूरी तरह नहीं भुना पाने की कीमत चुकानी पड़ी। मैच सडनडेथ शूटआउट खिंच गया।' 

उन्होंने आगे कहा, 'शूटआउट में 'किस्मत' अहम होती है और गोलरक्षक लाभ की स्थिति में होता है। शूटआउट में किस्मत हमारे साथ नहीं और बस यूं कह लीजिए की दिन हमारा नहीं था। मलयेशिया से हम रैंकिंग में तो बेहतर हैं ही अब यदि उसके हर खिलाड़ी से हमारे खिलाड़ी का आकलन करेंगे तो हमारा खिलाड़ी बेहतर निकलेगा। बस सेमीफाइनल में शायद दिन ही हमारा नहीं था। अभी भी दिल में बार बार यही कहता है कि हमें सुनहरा तमगा जीतना चाहिए , जो हो नहीं सका। हमें मलयेशिया के खिलाफ छोटी-छोटी गलतियां भारी पड़ी। अब हमे एशियन चैंपियंस ट्रॉफी और विश्व कप में शिरकत करनी है। ये दोनों ही हमारे लिए अहम टूर्नामेंट हैं और हमारा फोकस इन्हीं टूर्नामेंट पर है।'
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