भारत के पूर्व कप्तान और अनुभवी आक्रामक सेंटर हाफ मनप्रीत सिंह कहते हैं कि मलयेशिया के खिलाफ सेमीफाइनल में हार से टीम में हर कोई सकते में था। वह कहते हैं, 'हमारे लिए इस पर विश्वास करना मुश्किल हो गया था कि हम सेमीफाइनल में हार गए हैं। दरअसल हमें इस हार का मलाल इसलिए कुछ ज्यादा था कि हमने इसके लिए तैयारी में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। खैर टीम ने अपनी ताकत समेटी और पाकिस्तान के खिलाफ मैच में झोंक कर कांसा जीता और एशियाई खेलों से खाली हाथ आने से बच गए।'
आक्रमण के सूत्रधार और गोल करने में माहिर भारत की पुरुष हॉकी टीम के यंग स्ट्राइकर आकाशदीप सिंह कहते हैं कि जकार्ता एशियाई खेलों में टीम की शुरुआत बहुत अच्छी रही, लेकिन यह बात सभी को हमेशा जेहन में रखनी होगी असली मुकाबले नॉकआउट क्वॉर्टर और सेमीफाइनल से शुरू होते हैं।
आकाशदीप सिंह ने कहा, 'हमने एशियाई खेलों में शानदार अंदाज में आगाज किया था। बदकिस्मती से मलयेशिया के खिलाफ अहम सेमीफाइनल में हम अपनी क्षमता का 40 फीसदी भी नहीं खेल पाए थे। इसके बावजूद हमें गोल करने के लिए खूब मौके मिले, हमने बढ़त भी बनाई। हमें गोल करने के मौकों को पूरी तरह नहीं भुना पाने की कीमत चुकानी पड़ी। मैच सडनडेथ शूटआउट खिंच गया।'
उन्होंने आगे कहा, 'शूटआउट में 'किस्मत' अहम होती है और गोलरक्षक लाभ की स्थिति में होता है। शूटआउट में किस्मत हमारे साथ नहीं और बस यूं कह लीजिए की दिन हमारा नहीं था। मलयेशिया से हम रैंकिंग में तो बेहतर हैं ही अब यदि उसके हर खिलाड़ी से हमारे खिलाड़ी का आकलन करेंगे तो हमारा खिलाड़ी बेहतर निकलेगा। बस सेमीफाइनल में शायद दिन ही हमारा नहीं था। अभी भी दिल में बार बार यही कहता है कि हमें सुनहरा तमगा जीतना चाहिए , जो हो नहीं सका। हमें मलयेशिया के खिलाफ छोटी-छोटी गलतियां भारी पड़ी। अब हमे एशियन चैंपियंस ट्रॉफी और विश्व कप में शिरकत करनी है। ये दोनों ही हमारे लिए अहम टूर्नामेंट हैं और हमारा फोकस इन्हीं टूर्नामेंट पर है।'