वह बताते हैं, 'सेमीफाइनल मे मलयेशिया से मिली हार पर और बड़ी चुनौती इस हार से मिले झटके और ओलंपिक के लिए सीधे क्वॉलिफाई करने का सपना टूटने के साथ पाकिस्तान के खिलाफ कांसे के लिए मुकाबले में टीम को खुद को पूरे जोश के लिए तैयार करने की थी। कोच साहब हरेन्द्र सर ने कहा , जो बीत गया सो बीत गया। जो हो चुका उसे हम बदल नहीं सकते थे। मुझे फख्र है कि पाकिस्तान के खिलाफ भावनाओं के 'ज्वार' वाले मुकाबले में सभी पूरी शिद्दत से खेले और उसके खिलाफ जीत दर्ज कर 'कांसे' तो हासिल करने में कामयाब रहे।'
सेमीफाइनल में शायद दिन हमारा नहीं था : आकाशदीप सिंह
आक्रमण के सूत्रधार और गोल करने में माहिर भारत की पुरुष हॉकी टीम के यंग पर स्ट्राइकर आकाशदीप सिंह कहते हैं कि जकार्ता एशियाई खेलों में टीम की शुरुआत बहुत अच्छी रही लेकिन यह बात सभी को हमेशा जेहन में रखनी होगी असली मुकाबले नॉकआउट क्वॉर्टर और सेमीफाइनल से शुरू होते हैं। आकाशदीप सिंह ने 'अमर उजाला' से कहा, 'हमने एशियाई खेलों में शानदार अंदाज में आगाज किया था। बदकिस्मती से मलयेशिया के खिलाफ अहम सेमीफाइनल में हम अपनी क्षमता का 40 फीसदी भी नहीं खेल पाए थे। इसके बावजूद हमें गोल करने के लिए खूब मौके मिले, हमने बढ़त भी बनाई। हमें गोल करने के मौकों को पूरी तरह नहीं भुना पाने की कीमत चुकानी पड़ी। मैच सडनडेथ शूटआउट खिंच गया।
शूटआउट में 'किस्मत' अहम होती है और गोलरक्षक लाभ की स्थिति में होता है। शूटआउट में किस्मत हमारे साथ नहीं और बस यूं कह लीजिए की दिन हमारा नहीं था। मलयेशिया से हम रैंकिंग में तो बेहतर हैं ही अब यदि उसके हर खिलाड़ी से हमारे खिलाड़ी का आकलन करेंगे तो हमारा खिलाड़ी बेहतर निकलेगा। बस सेमीफाइनल में शायद दिन ही हमारा नहीं था। अभी भी दिल में बार बार यही कहता है कि हमें सुनहरा तमगा जीतना चाहिए , जो हो नहीं सका। हमें मलयेशिया के खिलाफ छोटी-छोटी गलतियां भारी पड़ी। अब हमे एशियन चैंपियंस ट्रॉफी और विश्व कप में शिरकत करनी है। ये दोनों ही हमारे लिए अहम टूर्नामेंट हैं और हमारा फोकस इन्हीं टूर्नामेंट पर है।'