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सरदार की 'सरदारी' में युवा तुर्कों का इम्तिहान

Fri, 10 Jan 2014 01:07 PM IST
सत्येन्द्र पाल सिंह/ अमर उजाला, दिल्ली
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भारतीय हॉकी टीम का दारोमदार एक बार फिर अपने कप्तान सरदार सिंह की 'सरदारी' पर रहेगा। सरदार की सरदारी में भारत के युवा तुर्कों का इम्तिहान होगा। हॉकी वर्ल्ड लीग फाइनल के लिए सरदार को खासी यंग टीम ही मिली है।
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भारत के नए ऑस्ट्रेलियाई हॉकी उस्ताद टैरी वॉल्श दिल्ली में शुक्रवार से शुरू हो रहे इस टूर्नामेंट में पहली बार अपने शागिर्दों की ताकत को तौलेंगे। इसमें भारत (10) सहित दुनिया की टॉप आठ टीमें शिरकत करेंगी।

इस टूर्नामेंट में शिरकत कर रही टीमों में भारत रैंकिंग के लिहाज से केवल पूल बी की टीम अर्जेंटीना (11) से ही एक पायदान ऊपर है।

भारतीय टीम के लिए अच्छी बात यह है कि वह इस साल मई में हेग (हॉलैंड) में होने वाले हॉकी वर्ल्ड कप का टिकट पा चुका है। ऐसे में चीफ कोच वॉल्श ने चोट से उबरे या घायल खिलाडिय़ों को हड़बड़ी में टीम में शामिल करने से परहेज ही किया।
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गुरविंदर सिंह चांडी और दानिश मुज्तबा हालांकि चोट से उबर चुके थे लेकिन वाल्श उन्हें टीम में शामिल करने से गुरेज ही किया है।

साथ ही यंग फॉरवर्ड आकाशदीप सिंह और हॉकी इंडिया लीग में इस बार सबसे महंगे बिके खिलाड़ी रमणदीप सिंह और यंग फुलबैक हरबीर सिंह संधू को भी टीम में नहीं चुना है।

भारत के हौसले हैं बुलंद
भारत (10) के पूल में जर्मनी (1), इंग्लैंड (4), न्यूजीलैंड(7) की टीमें हैं। पूल बी में ऑस्ट्रेलिया (2), हॉलैंड (3), बेल्जियम (5) अर्जेंटीना (11) की टीमें हैं।

इस टूर्नामेंट में शिरकत करने वाली सभी आठों टीमों क्वार्टर फाइनल में खेलेंगी। भारत भी यदि अंतिम चार में पहुंचने में कामयाब रहा तो यह यहां दुनिया की टॉप टीमों की इस लीग में मौजूदगी के बावजूद एक बड़ी उपलब्धि होगी।

भारत की टीम वर्ल्ड लीग सेमीफाइनल में भले छठे स्थान पर रही थी लेकिन इसके बाद उसने एशिया कप में दमदार प्रदर्शन कर साउथ कोरिया से फाइनल में करीबी मैच में हार के बाद दूसरा स्थान पाया था। तब भारत के लिए कोच की जिम्मेदारी हॉकी के डायरेक्टर रोलैंट ओल्टमैंस ने निभाई थी। अब भारत की टीम इस लीग में नए कोच टैरी वाल्श के मार्गदर्शन में मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में पूरे विश्वास से खेलने उतरेगी।

हर ओर सरदार के चर्चे
हर ओर भारत के सरदार के चर्चे हैं। 27 बरस के सरदार ने 2003 में अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज कर खुद को दुनिया का बेहतरीन ऑलराउंडर हॉकी खिलाड़ी साबित किया। वह बेल्जियम और हॉलैंड लीग में बतौर पेशेवर शानदार खेल से अपना लौहा मनवा चुके हैं।

खिताब का प्रबल दावा निश्चित रूप से जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, हॉलैंड और बेल्जियम का है। इसके बावजूद सरदार के खेल की सरदारी के तो जर्मनी के कोच मरकस वीज, ऑस्ट्रेलिया के सहायक कोच ग्राहम रीड, हॉलैंड के कोच पॉल वनास भी कायल है। वीज और रीड का मानना है कि यदि सरदार रंग में रहे तो भारत यहां इस वर्ल्ड लीग फाइनल में कुछ भी उलटफेर कर सकता है।

वर्ल्ड कप से अपनी ताकत को आंकने का मौका
यह वर्ल्ड लीग भारत सहित दुनिया की सभी टीमों के लिए खासतौर पर मई में होने वाले वल्र्ड कप से पहले अपने सभी विकल्पों को आजमाने के साथ अपनी खामियों के आकलन करने का मौका मुहैया कराएंगी।

सरदार सिंह भारत के आक्रमण और रक्षण की अहम कड़ी होंगे। भारत के पास वैयक्तिक कौशल वाले खिलाडिय़ों की कमी कभी नहीं रही। मौजूदा टीम में हॉकी की कलाकारी के लिए बतौर फॉरवर्ड अनुभवी एसवी सुनील के साथ युवराज वाल्मीकि, मंदीप सिंह, निकिन थिमैया हैं।

अफ्फान हो सकते हैं तुरुप का इक्का
भारत के पास अफ्फान यूसुफ के भी भोपाल की नफासत भरी हॉकी खेलने वाला बेहतरीन यंग स्ट्राइकर है। 19 वर्षीय अफ्फान यूसुफ को बीते साल के आखिरी महीने में हुए जूनियर वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम में न चुना बहुत अखरा था। सच है किस्मत कब करवट ले, कोई नहीं जानता। अफ्फान को जूनियर तो छोड़िए अचानक सीनियर भारतीय टीम में जगह मिल गई। जूनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप के बेस्ट खिलाड़ी रहे थे।

अफ्फान को हॉकी विरासत में मिली है। उनके चाचा समीर दाद भारत के लिए बतौर विंगर और स्कीमर एक दशक खेल चुके हैं। समीर की तरह अफ्फान अकेले अपनी हॉकी की कलाकारी से भारत की तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं।

अफ्फान जैसा खिलाड़ी टाईब्रेकर में बहुत उपयोगी साबित होगा, क्योंकि अब टाईब्रेकर में पेनल्टी स्ट्रोक की बजाय डी के बाहर से खिलाड़ी को गेंद को लेकर आठ सेकंड के भीतर गोलरक्षक को चकमा देकर गोल करना होता है। इस स्थिति में अफ्फान जैसे हॉकी के कलाकार का रोल अहम हो सकता है।

उस्तादों ने बिछाई है रणनीति की बिसात
भारत के हॉकी डायेक्टर रोलैंट ओल्टमैंस के साथ वाल्श ने एक बड़ी रणनीति अटैक के साथ मध्यपंक्ति को मजबूत बनाने की बनाई है। इन दोनों की मदद के लिए 1980 में मास्को ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाली टीम के लेफ्ट हाफ वासुदेवन भास्करन और राइट आउट महाराज कृष्ण कौशिक की बतौर सहायक कोच मौजूदगी भारत के लिए खासी मददगार साबित हो सकती है।

भारत के हॉकी के इन माहिर उस्तादों ने धर्मवीर सिंह, एसके उथप्पा और चिंगलेनसाना सिंह जैसे मूलत: फॉरवर्ड को अटैकिंग हाफ के रूप में आजमाने की रणनीति अपनाई है। इससे भारत के हमलों में तो तेजी आएगी उसकी मध्यपंक्ति को भी सहारा मिलेगा। मनप्रीत और खुद सरदार सिंह जैसे खिलाडिय़ों के बतौर हाफ मौजूद रहने से टीम प्रतिद्वंद्वी के हमले के वक्त भी संभल सकेगी।

बीरेंद्र लाकड़ा को अमित रोहिदास के साथ बतौर फुलबैक डिफेंस में उनकी साफ सुथरी टैकलिंग के कारण ही रखा गया है। फुलबैक वीआर रघुनाथ और रुपिंदर पाल सिंह के रूप में भारत के पास दो ड्रैग फ्लिकर टीम में रहेंगे। ये दोनों बतौर ड्रैग फ्लिकर तभी कामयाब हो सकेंगे जबकि भारत पर्याप्त पेनल्टी कॉर्नर हासिल करेगा।

सरदार सिंह, मनप्रीत, रघुनाथ और रुपिंदर पाल सिंह के रूप में भारत के पास मॉडर्न हॉकी में 'स्लैप शॉट' का पूरी कुशलता से इस्तेमाल करने वाले वाले चौकड़ी है। ये चारों हाफ लाइन या फिर 25 गज की रेखा से स्लैप शॉट लगा कर फॉरवर्ड मनदीप, अफ्फान और सुनील के लिए गोल करने के मौके मुहैया करा सकते हैं।
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