मेजर ध्यानचंद स्टेडियम पर भारतीय महिला हॉकी टीम के साथ इस बार कोई अनहोनी नहीं हुई। ओलंपिक क्वालीफायर की तरह इस बार उनके सामने दक्षिण अफ्रीका जैसा मजबूत प्रतिद्वंद्वी नहीं था। बावजूद इसके रूस ने मेजबान टीम को परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बेहद संघर्षपूर्ण मुकाबले में भारत को 1-0 से जीत नसीब हुई।
भारत और जापान के 13-13 अंक थे लेकिन बेहतर जीत के रिकॉर्ड से भारत ने न सिर्फ वर्ल्ड हॉकी लीग के राउंड-3 में प्रवेश किया बल्कि जापान को पछाड़ते हुए राउंड-2 का विजेता बनने का गौरव भी हासिल किया।
निर्धारित समय का हूटर बजते ही ऑस्ट्रेलियाई कोच नील हॉगुड का हाथों को उठाकर हवा में लहराना और बेंच पर बैठे सपोर्ट स्टाफ और रिजर्व खिलाड़ियों केसाथ ताली देना उनकी खुशी को बयां कर रहा था। हालांकि हॉगुड खुश जरूर हैं लेकिन एक नई शुरूआत के लिए वह कहते हैं कि जापान जैसी टीम के रहते सर्वोच्च रहना बड़ी बात है।
भारतीय टीम को टूर्नामेंट जीतने की आदत डालनी होगी। फिलहाल उन्हें मालूम है टीम को काफी सुधार करना है। खासतौर पर प्रदर्शन में निरंतरता लाना जरूरी है। इससे पहले भारतीय महिलाओं को पहले ही मिनट में पेनाल्टी कार्नर मिला लेकिन इसके बाद रूस ने उन्हें कोई मौका नहीं दिया।
पहला हॉफ खत्म होने से पहले दो पेनाल्टी कार्नर हासिल कर रूस ने मेजबानों को बैकफुट पर ला दिया। पहला हॉफ गोलरहित रहने के बाद 51वें मिनट में रानी रामपाल ने गोल दागा। रानी रामपाल को प्लेयर ऑफ द मैच व जसप्रीत कौर प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया।