हॉकी वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम की कमान एक बार फिर सरदार सिंह के हाथों में है। सरदार के पास 180 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का अनुभव है। 18 सदस्यीय टीम युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का मिश्रण है।
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पंजाब के जसजीत सिंह कूलर टीम में शामिल नया चेहरा हैं। वह पहली बार राष्ट्रीय टीम में चुने गए हैं।
वहीं कोच टेरी वॉल्श साफ कर देते हैं कि टीम से किसी चमत्कार की उम्मीद नहीं की जाए लेकिन वह वायदा करते हैं कि खिलाड़ी वर्ल्ड हॉकी लीग से बेहतर प्रदर्शन करेंगे।
अनुभवी खिलाड़ी युवराज फिर टीम से बाहर
31 मई से हेग में शुरू होने वाले वर्ल्ड कप के लिए अनुभवी गुरबाज सिंह की वापसी हुई है। लेकिन युवराज वाल्मीकि व अनुभवी दानिश मुजतबा को बाहर हो गए हैं।
ड्रैग फ्लिकर रूपिंदर पाल सिंह को उप कप्तान बनाया गया है। वॉल्श कहते हैं कि जब भारत 1975 में विश्व विजेता बना था तब वह ऑस्ट्रेलिया के युवा खिलाड़ी थे। उन्होंने 75 का फाइनल स्टैंड में बैठकर देखा था।
लेकिन यह बात 39 साल पुरानी है। आप इस टीम से रातों रात विजेता बनने की उम्मीद नहीं पाल सकते हैं। इसमें वक्त लगेगा।
हॉकी की नर्सरी संसारपुर से निकला एक और खिलाड़ी
पंजाब का संसारपुर गांव एक समय हॉकी की नर्सरी था। बलबीर सिंह हों या फिर अजीत पाल सिंह कूलर जाति के खिलाड़ियों ने इस गांव का नाम दुनिया भर में रोशन किया। लेकिन लंबे समय से इस परंपरा पर विराम लगा है। रविपाल सिंह अंतिम खिलाड़ी हैं तो इस गांव से भारतीय टीम के लिए खेले।
अब इस परंपरा को जसजीत सिंह कूलर आगे बढ़ाने जा रहे हैं। हालांकि जसजीत इस गांव में पैदा नहीं हुए। लेकिन उनकी रगों में खून यहीं का है। जसजीत भी कूलर हैं। उनके दादा इसी गांव से थे और आर्मी के लिए हॉकी खेलते थे।
जसजीत भी अपने परिवार की इस पंरपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। 24 साल के जसजीत इससे पहले कभी देश के लिए नहीं खेले। एचआईएल में यूपी विजार्ड्स के लिए खेलने के दौरान उन पर हॉकी इंडिया के डायरेक्टर हाई परफॉरमेंस रोलैंट ओल्टमेंस की नजर गई।
जानिए कौन-कौन है भारतीय टीम में
वर्ल्ड कप के लिए घोषित भारतीय हॉकी टीम में 18 खिलाड़ियों को शामिल किया गया है। पेश है खिलाड़ियों के नाम-
यह विश्व खिताब हासिल किए 39 साल हो गए हैं और आज 39 साल बाद 1975 का वर्ल्ड कप जीतने वाली हॉकी टीम के सम्मान की याद किसी हॉकी फेडरेशन को आई।
इस विश्व विजेता टीम के सदस्य शिवाजी पवार अब दुनिया में नहीं हैं। उनकी विधवा शीला पवार के मुंह से यही निकला, काश, उनके रहते यह सम्मान मिला होता तो उन्हें और अच्छा लगता।
कुआलालंपुर में विश्व विजयी बनने वाली इस टीम के 13 जीवित सदस्यों और 3 खिलाड़ियों के परिजनों को हॉकी इंडिया ने पौने दो लाख रुपए के चेक दिए।