अपनी हॉकी की कलाकारी से दुनिया की शीर्ष टीमों की रक्षापंक्ति को छका कर गोल करने मे माहिर रहे हॉकी 'कलाकार' के रूप में ख्यात रहे ग्वालियर के शिवेंद्र सिंह अब भारत की सीनियर पुरुष टीम के स्ट्राइकरों के उस्ताद के रूप में उन्हें हॉकी की कलाकारी सिखाएंगे। भारत की 2010 में नई दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेलों में रजत और ग्वांगजू एशियाई खेलों में कांसा जीतने वाली टीम के अहम स्ट्राइकर शिवेंद्र सिंह से यह जिम्मेदारी संभालने के बाद 'अमर उजाला' ने सबसे पहले ग्वालियर से फोन पर बात की।
शिवेंद्र ने कहा,'मुझे एक पखवाड़े पहले ही हॉकी इंडिया ने भारत की सीनियर पुरुष टीम के स्ट्राइकर का कोच पद संभालने का प्रस्ताव दिया था और मैंने इसे स्वीकार कर लिया है। भारतीय टीम अब इपोह में सुलतान अजलान कप में उपविजेता रह कर स्वदेश लौट आई है। मैं जल्द ही भारतीय हॉकी टीम से जुडने के बाद पूरी टीम से संवाद करूंगा। मैं ध्यान भारतीय स्ट्राइकरों को उनका कौशल बेहतर करने पर लगाउंगा। मैं भारतीय स्ट्राइकरों की फिनिशिंग और पॉजिशनिंग को बेहतर करने की कोशिश करूंगा।
अग्रिम पंक्ति किसी भी टीम की रक्षापंक्ति की रक्षण की पहली कड़ी होती है। टीम की अग्रिम पंक्ति में स्ट्राइकरों और फॉरवर्ड की जिम्मेदारी टीम के लिए हमले बोलने के साथ टीम की चौकसी में रक्षापंक्ति की मदद करने की होती है। मैदानी हमले पर जाते हुए डी में गोल करने के लिए स्ट्राइकर का कौशल मसलन डॉज यानी प्रतिद्वंद्वी रक्षापंक्ति को गच्चा देने की कला बेहद अहम होती है। स्ट्राइकर को डॉज का सही वक्त पर इस्तेमाल करना आना चाहिए। साथ ही स्ट्राइकर को गोल करने के लिए सही वक्त पर सही कोण से प्रतिद्वंद्वी टीम की रक्षापंक्ति को कैसे छकाने की कला भी आनी चाहिए। आज शूटआउट में एक बनाम एक यानी केवल गोलरक्षक को छकाने के लिए स्ट्राइकर डॉज देने में पारंगत हो तो वह टीम के लिए ज्यादा गोल कर सकता है।'
वह कहते हैं, 'मुझे पूरा भरोसा है कि भारतीय टीम 2020 के टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वॉलिफाई जरूर करेगी। हमारी टीम 2018 के जकार्ता एशियाई खेलों के सेमीफाइनल में क्षणिक चूक से ही हम ओलंपिक के लिए सीधे क्वॉलिफाई करने से चूक गए थे। ओडिशा हॉकी विश्व कप में भारतीय हॉकी टीम नीदरलैंड से बेहद करीबी क्वॉर्टर फाइनल अमित रोहिदास की गलती से 1-2 से हार गई बेशक गलती दबाव में किसी भी मुमकिन है। हमारी भारतीय टीम को इसी तरह की छोटी-छोटी गलतियों और खासतौर पर स्ट्राइकरों को डी के भीतर सही वक्त पर शॉट लेने की अहमियत समझनी होगी।
भारत के एनालिटिकल कोच क्रिस सिरिलो ऑस्ट्रेलिया के हैं और हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर डेविड जॉन भी भारतीय है। एक अन्य ऑस्ट्रेलियाई जॉन रीड का भारत के चीफ कोच की जिम्मेदारी संभालना तय है क्योंकि हॉकी इंडिया उनका नाम इस पद के लिए तय कर चुकी है। उनके नाम पर इस पद के लिए केवल मंत्रालय की मुहर लगने की औपचारिकता बाकी है। गोलकीपर कोच के रूप में भारतीय टीम के साथ उत्तर प्रदेश के पीयूष दुबे हाल ही जुड़ चुके हैं।
भारतीय हॉकी टीम के खेलने का स्ट्रक्चर इसीलिए फिलहाल ऑस्ट्रेलियाई ही है। यह भारतीय खिलाडिय़ों को यह ऑस्ट्रेलियाई स्ट्रक्चर बहुत रास आस आता है क्योंकि दोनों ही का यकीन आक्रामक हॉकी खेलने में है। चोट के कारण कई दिग्गजों को अजलान शाह कप के लिए आराम दिया गया था। अब देखना यह होगा कि चोट के कारण टीम से बाहर रहा कौन सा दिग्गज कितना फिट है। हमारा पूरा फोकस अब जून में भुवनेश्वर में होने वाले एफआईएच सीरीज फाइनल्स पर है।'
शिवेंद्र ने कहा, 'भारत के पास यंग मनदीप सिंह, सिमरनजीत सिंह, और सुमित कुमार के साथ अनुभवी रमणदीप सिंह, आकाशदीप सिंह और एस वी सुनील सरीखे स्ट्राइकर के रूप में बेहतरीन स्ट्राइकर हैं। भारत के यंग स्ट्राइकर में मनदीप सिंह को मैच की जरूरत के मुताबिक और सही वक्त पर डी में सही जाकर पहुंच कर गोल करना खूब आता है।
मनदीप 60 से 70 फीसदी गोलरक्षक के सामने गेंद को लेकर उसे चकमा देने में कामयाब रहते और इसलिए वह इस समय भारत के बेहतरीन स्ट्राइकर हैं। वहीं यंग सिमरनजीत भी स्ट्राइकर और बेहतरीन 'फीडर' हैं। सिमरनजीत की खासियत यह है कि वे यह बखूबी जानते हैं उन्हें कब किस साथी स्ट्राइकर के लिए गेंद बढ़ानी है और कब खुद डी के भीतर शॉट लशकर गोल करना है।'