वर्ल्ड हॉकी लीग सेमीफाइनल्स में टीम के प्रदर्शन से निराश भारतीय कप्तान सरदार सिंह ने कहा है कि खिलाड़ियों को बड़े मैचों के लिए मानसिक रूप से और मजबूत बनना होगा। साथ ही टीम को प्रदर्शन में निरंतरता पर काम करने की दरकार है।
उन्होंने यह भी कहा कि एशिया कप से पहले टीम को एक खेल मनोवैज्ञानिक की सख्त जरूरत है।
नीदरलैंड के रोटरडम में खेली गई एफआईएच विश्व हॉकी लीग के तीसरे दौर में भारत का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और टीम छठे स्थान पर रही। इसके साथ ही भारत ने अगले साल हेग में होने वाले वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई करने का सुनहरा मौका गंवा दिया।
भारतीय टीम अब अगले साल नीदरलैंड में होने वाले वर्ल्ड कप के लिए तभी क्वालीफाई कर सकेगी, जब वह अगस्त में होने वाला एशिया कप जीत ले।
सरदार ने कहा, 'हमने किसी भी मैच में अच्छी शुरुआत नहीं की। हम पांच मिनट अच्छा खेले और फिर हमने विपक्षी टीम को अगले 10 मिनट के लिए दबाव बनाने के लिए छोड़ दिया। टूर्नामेंट में हमारा प्रदर्शन बेहद खराब था।'
बकौल सरदार, 'हमने टूर्नामेंट में कई विभागों में गलतियां की। आयरलैंड के खिलाफ हम पहला मैच हम जीत सकते थे लेकिन हमारी गलतियों से यह ड्रॉ रहा, जिसका खामियाजा हमें भुगतना पड़ा। स्पेन के खिलाफ भी हम जीतने की स्थिति में थे, लेकिन मैच पेनाल्टी तक खिंचा और हम हार गए।'
उन्होंने कहा, 'बड़ी टीमों के खिलाफ हम मानसिक दबाव में आ जाते हैं, जिससे उबरना होगा। एशिया कप में अब बहुत कम समय बचा है और इस टीम को मानसिक रूप से और मजबूत बनाने की जरूरत है। साथ ही अपनी निरंतरता पर काम करने की जरूरत है। टीम को एक खेल मनोवैज्ञानिक चाहिए, ताकि बड़े टूर्नामेंटों में अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन कर सकें।'