वर्ल्ड चैंपियन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नामुमकिन को मुमकिन करने के लिए जिस जीवट और जज्बे की जरूरत थी वह भारतीय हॉकी टीम दिखा ही नहीं सकी। कोई चमत्कार नहीं हुआ। ऑस्ट्रेलिया के सामने भारत टिक ही नहीं पाया।
अपने उस्ताद रिक चार्ल्सवर्थ की हर सीख को मैदान पर अमली जामा पहनाते हुए ऑस्ट्रेलिया ने भारत को हेग में पुरुष हॉकी विश्व कप के पूल-ए के मैच में 4-0 से हराकर अपना अजेय क्रम रखा।
भारत के गोलकीपर पीआर श्रीजेश ने पहले हाफ में अपना सबसे कमजोर खेल दिखाया और शुरू में ही तीन ऐसे गोल खाए जिन्हें वह आसानी से रोक सकते थे, हालांकि दूसरे हाफ में उन्होंने जरूर कुछ अच्छे बचाव किए।
भारतीय कप्तान सरदार सिंह, गुरबाज सिंह और वीआर रघुनाथ ही बमुश्किल पूरे मैच में तीन-चार ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों से गेंद छीन पाए। ऑस्ट्रेलिया ने 6 में से 3 पेनल्टी कॉर्नरों को गोल में बदला।
भारत को दूसरे हाफ में गोल करने के तीन मौके मिले लेकिन युवराज सिंह और धर्मवीर इन्हें गोल में नहीं बदल पाए। सबसे पहले सेमीफाइनल में पहुंच चुकी ऑस्ट्रेलिया ने लगातार पांचवीं जीत हासिल की जबकि भारत के पांच मैचों में केवल मलेशिया के खिलाफ जीत और स्पेन के खिलाफ ड्रॉ से पूल में पांच मैचों से चार अंक ही रह गए।
भारतीय टीम के फुलबैक रूपिंदर पाल सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के हमले को नाकाम करने के लिए अपने चिर-परिचित स्लैप पुश की बजाय लंबे स्कूप से गेंद को अपने गोल से बाहर कर साथी फॉरवर्ड की ओर गेंद बढ़ाने की रणनीति अपनाई।
मंदीप सिंह और आकाशदीप इस मैच में महज ‘यात्री’ ही नजर आए। कप्तान मार्क नोल्स, किरन गोवर्स, एडी ओकेनडन से सजी ऑस्ट्रेलिया ने जैमी ड्वेयर, एरेन जालवस्की और फर्गुस कवानगा के सहयोग से भारत के गोल पर दनादन हमलों का ऐसा तांता बांधा कि शुरू के 22 मिनट में ही 4-0 की बढ़त लेकर मैच लगभग अपने पक्ष में कर लिया था।
गोवर्स ने पहला गोल किया, जबकि क्रिस सिरिलो ने पहले और तीसरे पेनल्टी कॉर्नर तथा एंडी जेरमी हेवर्ड ने दूसरे पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदला।