फीफा में अपने सामान को प्रोमोट करने के मामले में पाकिस्तान सबसे आगे है। इस बार भी फीफा वर्ल्डकप की खास चिप लगी आधिकारिक गेंद टेल्स्टार 18 के उत्पादन के अधिकार हासिल किए तो वहीं चीन ने यूरोप के देशों को फुटबॉल गेंदों की आपूर्ति के मामले में भारत को पछाड़ दिया। इस मामले में वियतनाम जैसे देश भी भारत को पछाड़कर आगे निकले हैं जिन्होंने की बड़े ऑर्डर हासिल किए हैं।
जालंधर की एक फुटबॉल निर्माता कंपनी के मालिक ने बताया कि पिछले फीफा वर्ल्डकप में जहां 400,000 गेंदे बनाई थीं जिसमें से केवल फीफा से ही 80,000 गेदों का ऑर्डर था। वहीं इस साल उन्हें केवल 20,000 गेंदों का ही ऑर्डर मिला है। इसके अलावाव भारतीय फुटबॉल निर्माताओं की मुसीबतें पहले से ही कम नहीं हैं।
क्षमताओं और कुशल श्रम में कमी, खराब बुनियादी ढांचा, और रुपये का मूल्य जैसी समस्याएं पहले ही इस उद्योग के लिए बड़ी चुनौतियां के रूप में ही मौजूद हैं। इसमें जीएसटी की वजह से एक्साइज ड्यूटी की रीफंड में कमी ने परेशानी बढ़ा दी है। डॉलर के मुकाबले रुपया भी दिन प्रतिदिन कमजोर होता जा रहा है। जालंधर के ही शांत स्पोर्ट्स इंडस्ट्री के अमन चोपड़ा का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत भी एक खास मसला है।
भारत में जहां डॉलर 69 रुपये का है, वहीं पाकिस्तान में यह 122 रुपये के करीब है। गुप्ता का कहना है कि भारत में फुटबॉल सिलने वाले कुशल श्रमिकों में खासी गिरावट आई है। युवा फुटबॉल सिलने के बजाए मॉल में काम करना ज्यादा पसंद करते हैं। पुरानी पीढ़ी ने इसे काफी पहले छोड़ दिया है लेकिन उसे आगे ले जाने वाला कोई नहीं है।
पाकिस्तान के सियालकोट के एक प्रमुख फुटबॉल निर्माता कंपनी ने बताया कि एडिडास ने चीन की कंपनी को छोड़कर उनकी कंपनी को चुना लेकिन इस बार उनके भी ऑर्डर में कमी है। इसका कारण यह बताया जा रहा है कि मशीन की सिली हुई गेंदों की मांग ज्यादा है जो कि वास्तव में सिली हुई नही बल्कि पैनल्स को चिपकाकर बनाई हुई गेंद होती है।