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फीफा विश्व कप 2018: न क्रोएशिया जीती और न हुई डेनमार्क की हार, यह गोलकीपर्स की जीत है

Mon, 02 Jul 2018 05:01 PM IST
स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली
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अगर कोई फैन, एक्सपर्ट या फुटबॉल पंडित सोचता हो कि पेनल्टी शूटआउट सिर्फ किस्मत का खेल है तो उसे फीफा विश्व कप 2018 में क्रोएशिया और डेनमार्क का मुकाबला जरूर देखना चाहिए। 1 जुलाई की रात नॉकआउट राउंड में ये दोनों टीम आमने-सामने थी। मैच का फैसला पेनल्टी शूटआउट में हुआ। आमतौर पर सभी खेलप्रेमियों का यही मानना होता है कि पेनल्टी रोकना असंभव है। अगर गोल बच भी जाए तो वह तुक्का करार दे दिया जाता है। लोगों की माने तो इसमें भाग्य भी अहम किरदार निभाता है।

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लेकिन क्या वाकई में ऐसा ही होता है? क्या पेनल्टी तुक्के में ही रूकती है? क्या वाकई यही सच है? ऐसे सभी सवालों का जवाब रविवार रात क्रोएशिया और डेनमार्क के गोलकीपर्स ने दे दिया। उन्होंने बता दिया कि स्किल्स, फुर्ती-चुस्ती-मुस्तैदी और प्रत्याशा महज डिक्शनरी के शब्द नहीं। भले ही क्रोएशिया ने डेनमार्क को हराते हुए क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया हो, लेकिन यह खेल क्रोएशिया की जीत से ज्यादा दोनों ही टीम के गोलकीपर्स के लिए याद रखा जाएगा।

क्रोएशिया के गोली डेनिएल सुबासिक पेनल्टी शूटआउट में 3 शॉट रोकते हुए मैच के हीरो बन गए। मगर डेनमार्क के गोलकीपर कैस्पर शेमीचेल को भूल जाना यहां बेइमानी होगी। नतीजा भले ही उनकी टीम के पक्ष में न रहा हो पर पूरे मैच के दौरान दोनों ने पेनल्टी पर ही बराबर 3-3 गोल बचाए। भले ही शेमीचेल पेनल्टी शूटआउट में आखिरी प्रयास में विफल रहे हो। मगर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अतिरिक्त समय में (116 मिनट) फाउल के चलते क्रोएशिया को मिली पेनल्टी को अगर वह नहीं बचाते तो मैच उसी वक्त डेनमार्क से काफी दूर छिटक जाता। उनके उस सफल प्रयास के चलते ही मैच पेनल्टी शूटआउट तक गया।

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जीते तो बस गोलकीपर्स, विजयी हुआ तो फुटबॉल

क्रोएशियन स्ट्राइकर लुका मोड्रिक लगभग गोल कर चुके होते अगर माउथ के ठीक सामने डेनमार्क डिफेंडर जर्गेनसन उन्हें पैर फंसाकर गिरा नहीं देते। नतीजतन क्रोएशिया को पेनल्टी मिली। मगर मुस्तैद शेमीचेल ने न सिर्फ यह गोल बल्कि डेनमार्क के लिए मैच भी बचाया। पेनल्टी शूटआउट में भी दोनों ने जबरदस्त जांबाजी दिखाई। दोनों अपने देश के लिए पहला शॉट बचाने में कामयाब रहे तो अगले 2 शॉट दोनों ही नहीं बचा पाए। चौथे शॉट में दोनों गोलकीपर्स ने फिर करिश्मा दोहराया। दोनों ही टीम इस बार गोल नहीं कर पाई।

मैच अब सांस थाम देने वाले रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका था। पांचवा प्रयास दोनों ही टीम के लिए 'करो या मरो' स्थिति लिए खड़ा था। शॉट निकोलई जर्गेनसन को लगाना था। सामने थे उत्साह से लबरेज क्रोएशियन गोली सुबासिक। सीधा किक बहुत ही खराब। बॉल पैरों से ही रूक गई। अंतिम शॉट क्रोएशियन खिलाड़ी को लगाना था। अगर डेनमार्क के शेमीचेल बचा पाते तो खेल सडन डेथ पर जाता। अफसोस कि ऐसा नहीं हो पाया, इवान राकिटिच ने बड़े ही आराम से गोल कर क्रोएशिया को 20 साल बाद क्वार्टर फाइनल में पहुंचाया। अब अगले शनिवार को क्रोएशिया का मुकाबला रूस से होगा।

निश्चित तौर पर रविवार की रात डेनमार्क के गोलकीपर कैस्पर शेमीचेल को नींद नहीं आई होगी। पूरे मैच में शानदार बचाव करने के बाद एक गलत प्रयास ने उनके सारे किए-धरे पर पानी फेर दिया। वाकई क्रोएशिया के सुबासिक अपने देश के लिए हीरो बने, लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि इस मैच में न क्रोएशिया जीता और न डेनमार्क की हार हुई। जीते तो बस गोलकीपर। विजयी हुआ तो सिर्फ फुटबॉल।
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