क्रोएशियन स्ट्राइकर लुका मोड्रिक लगभग गोल कर चुके होते अगर माउथ के ठीक सामने डेनमार्क डिफेंडर जर्गेनसन उन्हें पैर फंसाकर गिरा नहीं देते। नतीजतन क्रोएशिया को पेनल्टी मिली। मगर मुस्तैद शेमीचेल ने न सिर्फ यह गोल बल्कि डेनमार्क के लिए मैच भी बचाया। पेनल्टी शूटआउट में भी दोनों ने जबरदस्त जांबाजी दिखाई। दोनों अपने देश के लिए पहला शॉट बचाने में कामयाब रहे तो अगले 2 शॉट दोनों ही नहीं बचा पाए। चौथे शॉट में दोनों गोलकीपर्स ने फिर करिश्मा दोहराया। दोनों ही टीम इस बार गोल नहीं कर पाई।
मैच अब सांस थाम देने वाले रोमांचक मोड़ पर पहुंच चुका था। पांचवा प्रयास दोनों ही टीम के लिए 'करो या मरो' स्थिति लिए खड़ा था। शॉट निकोलई जर्गेनसन को लगाना था। सामने थे उत्साह से लबरेज क्रोएशियन गोली सुबासिक। सीधा किक बहुत ही खराब। बॉल पैरों से ही रूक गई। अंतिम शॉट क्रोएशियन खिलाड़ी को लगाना था। अगर डेनमार्क के शेमीचेल बचा पाते तो खेल सडन डेथ पर जाता। अफसोस कि ऐसा नहीं हो पाया, इवान राकिटिच ने बड़े ही आराम से गोल कर क्रोएशिया को 20 साल बाद क्वार्टर फाइनल में पहुंचाया। अब अगले शनिवार को क्रोएशिया का मुकाबला रूस से होगा।
निश्चित तौर पर रविवार की रात डेनमार्क के गोलकीपर कैस्पर शेमीचेल को नींद नहीं आई होगी। पूरे मैच में शानदार बचाव करने के बाद एक गलत प्रयास ने उनके सारे किए-धरे पर पानी फेर दिया। वाकई क्रोएशिया के सुबासिक अपने देश के लिए हीरो बने, लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि इस मैच में न क्रोएशिया जीता और न डेनमार्क की हार हुई। जीते तो बस गोलकीपर। विजयी हुआ तो सिर्फ फुटबॉल।