जापान की टीम गुरुवार को जब अपने आखिरी ग्रुप मैच में पोलैंड के खिलाफ मैदान में उतरेगी तो उसका लक्ष्य बड़ी जीत के साथ न सिर्फ नॉकआउट का टिकट कटाने की होगी बल्कि अपने ग्रुप एच में शीर्ष पर रहने का भी होगा।
कोलंबिया को 2-1 से शिकस्त देकर जीत के साथ आगाज करने वाली जापानी टीम ने दूसरे मैच में सेनेगल से 2-2 से ड्रॉ खेला था। अब जापान की निगाह 16 साल बाद ग्रुप चरण में अजेय रहने पर भी है। इससे पहले वह 2002 में दो जीत और एक ड्रॉ के साथ अजेय रहते हुए अंतिम-16 में पहुंची थी। अगले दौर में पहुंचने के लिए जापान को सिर्फ ड्रॉ की ही जरूरत है। उसका दारोमदार एक बार फिर स्टार खिलाड़ी केसुक होंडा पर होगा जो शानदार फॉर्म में चल रहे हैं।
जीत से विदा चाहेगा पोलैंड : पहले ही विश्व कप से बाहर हो चुकी पोलैंड की टीम बड़ा उलटफेर कर जीत के साथ विदा होना चाहेगा। पिछले 80 वर्षों में कभी भी विश्व कप में ऐसा नहीं हुआ जब उसने ग्रुप चरण में एक भी मैच नहीं जीता हो। सिर्फ के 1938 के उसके पदार्पण टूर्नामेंट में ही ऐसा हुआ था जब वह बिना कोई मैच जीते बाहर हो गई थी। 12 साल बाद विश्व कप में खेल रही पोलैंड की टीम ने पिछले दोनों विश्व कप (2002, 2006) में अपना अंतिम मुकाबला जीता है।
इतिहास बदलने पर जापान की नजर : जापान पिछले चार मैचों से यूरोपियन प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ गोल नहीं कर पाया है। इस बार वह यह मिथक तोड़कर जीत दर्ज करने को बेताब होगा। उसने इस दौरान दो गोल रहित ड्रॉ और दो मैच हारे। आखिरी जीत 2010 में डेनमार्क के खिलाफ 3-1 से दर्ज की थी।
पोलैंड बाहर होने वाली पहली यूरोपियन टीम : पोलैंड इस विश्व कप से बाहर होने वाली पहली यूरोपियन टीम है। यह लगातार तीसरा मौका है जब वह (2002, 2006, 2018) ग्रुप चरण से आगे नहीं बढ़ी। यही नहीं पिछली बार पोलैंड का इस वैश्विक टूर्नामेंट के एशियाई टीम से सामना 2002 में दक्षिण कोरिया से हुआ था जहां उसे 2-0 से मात मिली थी।
:: नंबर गेम :::
-02 मैच दोनों के बीच खेले गए हैं जिनमें जापान ने पोलैंड को शिकस्त दी है । विश्व में यह दोनों की पहली भिड़ंत होगी
-03 विश्व कप में (2010, 14, 18) लगातार गोल दागने वाले केसुक होंडा पहले जापानी खिलाड़ी हैं। टीम के विश्व के पिछले दस गोल में से सात में होंडा शामिल रहे हैं। इस दौरान उन्होंने चार किए और तीन में मदद की।