फुटबॉल जगत में फिक्सिंग के महाजाल की सच्चाई सामने आने से कोहराम मच गया है। यूरोपियन पुलिस फोर्स यूरोपोल, यूरोपियन एंटी क्राइम एजेंसी और नेशनल प्रोसीक्यूटर्स की संयुक्त जांच में खुलासा हुआ है कि 2008 से 2011 के बीच क्लब और राष्ट्रीय स्तर पर खेले गए 680 फुटबॉल मैच फिक्स थे।
चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें विश्व कप के दो क्वालीफाइंग मुकाबले भी शामिल हैं। साथ ही यूरोपियन चैंपियनशिप और चैंपियंस लीग के मुकाबले भी फिक्स होने की बात कही गई है।
गौरतलब है कि विश्व कप क्वालीफाइंग मैचों को फिक्स करना बेहद मुश्किल होता है। पिछले महीने खुद फीफा अध्यक्ष विश्व कप क्वालीफाइंग मैच फिक्स होने की बात को सिरे से खारिज कर चुके हैं।
यूरोपीय संघ की पुलिस जांच एजेंसी यूरोपोल ने कहा है कि उसे इस बात के सबूत मिले हैं कि यूरोप, अफ़्रीक़ा, एशिया और लैटिन अमेरिका के फुटबॉल मैचों में बड़े पैमाने पर मैच फ़िक्सिंग हो रही है। यूरोपोल ने यह खुलासा 15 देशों की साझा पुलिस जांच के बाद किया है। जांच में पाया गया कि अकेले यूरोप में 380 जबकि विश्व भर में हुए 680 फ़ुटबॉल मैच फ़िक्स थे।
संस्था के मुताबिक़ उन्होंने यूरोप में हुए तक़रीबन 400, और अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका को मिलाकर 300 मैचों की पहचान है कि जो इस दायरे में आते हैं।
सिंगापुर से चलता है गोरखधंधा
फिक्सिंग का यह सारा रैकेट सिंगापुर से संचालित किया जाता है। फिक्सिंग के लिए खिलाड़ियों, अधिकारियों को प्रत्येक मैच के लिए करीब 72.53 लाख रुपये (एक लाख यूरो) दिए जाते हैं। हर साल एक ट्रिलियन डॉलर (53 लाख करोड़ रुपये) का दांव खेलों पर लगाया जाता है, जिसमें से अधिकतर राशि फुटबॉल पर लगाई जाती है।
यूरोपोल के निदेशक रॉब वेनराइट ने कहा है, 'ये काम एशिया स्थित एक गिरोह का है जो यूरोप के अपराधियों के साथ मिलकर ये धंधा चला रहा है।' संस्था का कहना है कि इस काम में कम से कम 400 लोगों का हाथ है, जिसमें खिलाड़ी से लेकर मैच और क्लब अधिकारी और अपराधी शामिल हैं।
फुटबॉल ही क्यों
फुटबॉल दुनिया का सबसे अधिक लोकप्रिय खेल है। स्टेडियम के अलावा अरबों लोग इसे टीवी पर देखते हैं, जिससे क्लबों और प्रसारणकर्ताओं को बेहिसाब लाभ होता है।