फीफा अंडर-17 वर्ल्ड कप में खेल रही भारतीय टीम में दो फुटबॉलर सनी धालीवाल और नमित देशपांडे ऐसे हैं जिनकी नागरिकता तो भारत की है, लेकिन लालन-पालन विदेश में हुआ है। विदेश में रहने वाले ऐसे भारतीय फुटबालरों की खोज ऑल इंडिया फुटबाल फेडरेशन आगे भी जारी रखने जा रहा है।
खास बात यह है कि इसमें खेल मंत्रालय भी उसकी मदद करेगा। यही नहीं इस वर्ल्ड कप में खेलने वाली इस अंडर-17 भारतीय टीम को विरासत केरूप में रखने की तैयारी कर ली गई है। इस टीम को अंडर-20 फीफा वर्ल्ड कप के लिए तैयार करने को भी एआईएफएफ और खेल मंत्रालय ने कमर कस ली है।
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खेल मंत्रालय ने अंडर-17 टीम को तैयार करने के लिए पिछले तीन सालों में तकरीबन 20 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। ऐसे में मंत्रालय यह बिलकुल नहीं चाहता है कि वर्ल्ड कप के बाद यह टीम तितर-बितर हो जाए या फिर इसके प्रतिभाशाली फुटबॉलरों को विदेशी क्लब तोड़ लें। यही कारण है कि मंत्रालय और फेडरेशन दोनों इस टीम को विरासत के रूप में संभालकर रखना चाहते हैं जो निकट भविष्य में देश के लिए फुटबॉल में ताकत बन सके।
इसी को ध्यान में रखते हुए एआईएफएफ ने मंत्रालय की मदद से 2019 में होने वाले अंडर-20 फीफा वर्ल्ड कप के लिए मेजबानी का दावा ठोका है। अगर मेजबानी मिली तो इस टीम को वर्ल्ड कप केलिए तैयार किया जाएगा। अगर मेजबानी नहीं भी मिली तो भी यही टीम क्वालीफाइंग में खेलेगी। यही नहीं इसी टीम को फेडरेशन ने अंडर-19 एशिया चैंपियनशिप में खिलाने को कमर कसी है।
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मंत्रालय और फेडरेशन यह चाहते हैं कि टीम की एकजुटता को बनाए रखा जाए। इसके लिए इस टीम को आगे से आई लीग में खिलाया जाएगा। दूसरी ओर मंत्रालय और फेडरेशन मिलकर विदेश में रहने वाले प्रतिभाशाली युवा भारतीय फुटबॉलरों की खोज को आगे भी धार देंगे। इसके लिए मंत्रालय की ओर से तैयार टैलेंट सर्च पोर्टल की भी मदद ली जाएगी।