ऐसे में जबकि कई दावेदारों की हालत पतली है, फ्रांस की टीम पेरू के खिलाफ गुरुवार को जीत के साथ अंतिम-16 के लिए अपनी जगह पक्का करना चाहेगी। फ्रांस का पलड़ा पेरू के खिलाफ भारी माना जा रहा है जिसे पहले मैच में डेनमार्क के हाथों 0-1 से हार का सामना करना पड़ा था। डिडियर डेश्चेंप की टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2-1 की जीत में ज्यादा प्रभावशाली प्रदर्शन नहीं कर पाई थी।
वीडियो असिस्टेंट रेफरी (वीएआर) तकनीक की मदद से मिली पेनाल्टी पर ग्रिजमैन ने गोल किया था जबकि दूसरा गोल आत्मघाती था जोकि मैच से दस मिनट पहले हुआ था। एक ऐसी टीम जिसमें ग्रिजमैन के अलावा काइलिन म्बापे और ओस्माने डेम्बेले जैसे फारवर्ड हो उनसे बेहतर की उम्मीद की जाती है। गत चैंपियन जर्मनी को पहले मैच में मेक्सिको से हार का सामना करना पड़ा। स्पेन, अर्जेंटीना और ब्राजील अन्य प्रमुख टीमों को पहले मैच में अंक बांटने पड़े। पेरू के खिलाफ फ्रांस के पास मौका है कि वह दिखाए कि उसे दावेदारों में शामिल किया जाना चाहिए।
डेश्चेंप 1998 में विश्व कप विजेता रही टीम के सदस्य रहे हैं। उनके पास अग्रिम पंक्ति के चयन को लेकर विचार करने की जरूरत है क्योंकि ओलिवर गिरोर्ड भी एक विकल्प हैं। ग्रुप सी के मुकाबले से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में उपकप्तान राफेल वारने ने म्बापे का बचाव किया उन्होंने कहा कि19 वर्षीय म्बापे ने जो किया है उतना कम खिलाड़ी ही कर पाते हैं। वह बेहद प्रतिभाशाली हैं। इसके साथ ही उन्होंने पॉल पोग्बा का भी समर्थन किया जो पिछले सीजन में प्रीमियर लीग में लय पाने के लिए संघर्ष करते रहे और ज्यादातर समय बेंच पर रहे।
उधर पेरू की टीम को अपने प्रशंसकों से बड़ा समर्थन मिल रहा है जो बड़ी संख्या में रूस आए हुए हैं। 1982 के बाद पहला विश्व कप खेल रही पेरू की टीम अगर यह मुकाबला भी हार गई तो उसकी नॉकआउट दौर में पहुंचने की उम्मीदें धराशायी हो जाएंगी। टीम की उम्मीदें मुख्यत: अपने 34 वर्षीय स्ट्राइकर पाब्लो गुरेरो पर हैं जिन्हें ड्रग प्रतिबंध का फैसला पलटने के बाद अंतिम समय में टीम में शामिल किया गया। डेनमार्क के खिलाफ देश के लिए सर्वाधिक गोल करने वाले गुरेरो अंतिम 30 मिनट में उतरे थे।