अब एक फॉरेंसिक एक्सपर्ट जो कि शव परीक्षा का हिस्सा रहे थे, उन्होंने गुरुवार को आरोपी सातों चिकित्सा पेशेवरों के खिलाफ गवाही दी। फॉरेंसिक डॉक्टर मौरिसियो कैसिनेली ने कहा कि माराडोना के फेफड़ों में कम से कम 10 दिनों से पानी जमा हो रहा था, लेकिन उनकी मौत हार्ट फेलियर और लिवर सिरोसिस के कारण हुई थी। उन्होंने न्यायाधीशों से कहा कि उनकी देखभाल करने वाले डॉक्टरों और नर्सों को इस मामले में ध्यान देना चाहिए था।
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कैसिनेली ने कहा कि माराडोना के दिल का वजन सामान्य से लगभग दोगुना था। इससे उन्हें अपनी मृत्यु से कम से कम 12 घंटे पहले काफी दर्द हुआ होगा। माराडोना का 25 नवंबर, 2020 को 60 वर्ष की आयु में निधन हो गया। दिमाग में खून का थक्का जमा होने की वजह से उनकी सर्जरी हुई थी और वह अपने घर में रिहैब और रेस्ट पर थे। उन्होंने दशकों तक कोकीन और शराब की लत से लड़ाई लड़ी थी। माराडोना की मेडिकल टीम पर मुकदमा है। इस पूरे कांड को अभियोजकों ने माराडोना के जीवन के अंतिम दिनों का 'हॉरर थिएटर' कहा है।
माराडोना की मौत दिल का दौरा पड़ने और एक्यूट पल्मोनरी एडिमा (ऐसी स्थिति जहां फेफड़ों में तरल पदार्थ जमा हो जाता है) की वजह से हुई। कैसिनेली ने कहा कि जिस घर में माराडोना का निधन हुआ, वह रिहैब के लिए उपयुक्त स्थान नहीं था। मामले में उनकी मेडिकल टीम के सात चिकित्सा पेशेवरों पर 'संभावित इरादे से हत्या' का आरोप लगाया गया है। उन पर आरोप है कि यह जानने के बावजूद कि घर लाना उनके मरीज की मौत का कारण बन सकता है, माराडोना को घर लाया गया।
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इन सातों पर आठ से 25 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। अभियोजकों का आरोप है कि फुटबॉलर को उनकी मृत्यु से पहले दर्द के साथ छोड़ दिया गया था। जुलाई तक चलने वाले लंबे समय से लंबित मुकदमे में लगभग 120 गवाहों के गवाही देने की उम्मीद है।