रिकार्डो खुलासा करते हैं कि बोंडी की टीम में शामिल होने के बाद उन्हें एक महत्वपूर्ण मुकाबला खेलने जाना था। उन्होंने आर्टिफिशियल टर्फ पर प्रैक्टिस करने के बजाय बोंडी के ऊबड़-खाबड़ मैदान पर प्रैक्टिस करने का फैसला लिया। यह वही मैदान है जहां बोंडी के ज्यादातर युवा प्रैक्टिस किया करते हैं। इस मैदान पर बाउंस का कुछ अतापता नहीं था।
किक लगाने पर धूल उड़ा करती थी। और यही वह जगह थी जहां सबसे कठिनाई से फुटबॉल खेली जा सकती थी। यहीं से खेलकर मबापे पहले मोनाको उसके बाद पेरिस सेंट जर्मेन और अब फ्रांस की टीम में पहुंचे हैं। बोंडी के इस मैदान पर आज भी बड़ी तादाद में युवा फुटबॉलर पहुंच रहे हैं।
बोंडी में एंटोनियो रिकार्डो ऐसे कोच हैं जो लंबे समय से यहां के बच्चों को फुटबॉल सिखा रहे हैं। मबापे भी सबसे पहले रिकार्डो के पास आए थे। वह बताते हैं कि बचपन से ही वह काफी तेज दौड़ता था। उसे ड्रिब्लिंग करने की आदत थी। हालांकि फुटबॉल में ड्रिब्लिंग को इतना अच्छा नहीं माना जाता है, लेकिन उन्होंने उसे कभी यह करने से नहीं रोका।
रिकार्डो का मानना था कि मबापे के खेल का सबसे अच्छा पहलू ही लोगों को छकाते हुए ड्रिब्लिंग करना था। फिर वह उसे ऐसा करने से कैसे रोक सकते थे। आज उनका यही पक्ष उनकी बड़ी उपलब्धि बनता दिखाई दे रहा है।