पांच बार का चैंपियन ब्राजील, स्विट्जरलैंड और सर्बिया (तब यूगोस्लाबिया) 68 साल बाद एक बार फिर एक ही ग्रुप में हैं। इससे पहले यह तीनों ब्राजील में 1950 में हुए वैश्विक टूर्नामेंट में एक ही ड्रॉ में थे। तब ब्राजील को उरुग्वे से हारकर उपविजेता बनकर ही संतोष करना पड़ा था।
अपनी सरजमीं पर चार साल पहले हुए विश्व कप में ब्राजील भले ही सेमीफाइनल में जर्मनी के हाथों 1-7 की अपनी सबसे बड़ी हार के साथ बाहर हो गया हो पर इस बार वह रिकॉर्ड छठी ट्रॉफी जीतने को बेताब है। स्टार खिलाड़ी नेमार के फिट होने से उसकी उम्मीदें बढ़ गई हैं।
जब ब्राजील ने तोड़ा था स्वीडन का सपना : स्वीडन सिर्फ एक बार 1958 में विश्व कप के फाइनल में पहुंचा था जहां ब्राजील ने 5-2 से शिकस्त देकर विश्व विजेता बनने का उसका सपना तोड़ दिया था। इस बार उसे चार बार की चैंपियन और आठ बार की फाइनलिस्ट जर्मनी से ग्रुप चरण में ही पार पाना आसान नहीं होगा।
12 मैचों में सिर्फ एक जीत : चार बार विश्व कप में खेल चुकी ट्यूनिशया ने 12 मैचों के सिर्फ एक जीत दर्ज की है। उसने अपने पदार्पण मैच में ही 1978 में मैक्सिको को 3-1 से हराया था। इसके बाद उसने सात मैच हारे और चार ड्रॉ खेले। 12 साल बाद अपना पांचवां वैश्विक टूर्नामेंट खेलने जा रही ट्यूनिशिया 20 साल बाद इंग्लैंड से खेलेगी। 1998 के विश्व कप में उसे इंग्लैंड से 0-2 से हार मिली थी। ट्यूनिशिया को इस बार दूसरी जीत के साथ ही ग्रुप चरण से भी आगे जाने की उम्मीद है।
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