फुटबॉल की दुनिया में भारत को सोया हुए शेर कहा जाता है। खुद फीफा भारत को यह उपमा दे चुका है लेकिन हर चार साल में जब विश्व कप आता है तो लगता है कि सोए शेर को अब जाग जाना चाहिए। विश्व कप में भारत का खेलना अभी तक तो एक ख्वाब ही बनकर रह गया है। भारतीय दिग्गज बाईचुंग भूटिया और आईएम विजयन का मानना है कि तस्वीर तब तक नहीं बदलेगी जब तक कि हम फुटबॉल का कल्चर विकसित नहीं करेंगे।
भारत के लिए 104 मैच खेलने वाले बाईचुंग भूटिया ने कहा कि जब विश्व कप आता है तभी हम फुटबॉल की बातें करते हैं। हमें फुटबॉल को संस्कृति का हिस्सा बनाने की जरूरत है। मेसी की टीम अर्जेंटीना के साथ दोस्ताना मैच और बेयरन म्यूनिख के साथ भूटिया का विदाई मैच पूरे देश में सुर्खियां बटोरता है। पिछले साल हमने अंडर-17 फीफा विश्व कप का सफल आयोजन किया।
कुछ वर्षों से भारतीय टीम लगातार अच्छा प्रदर्शन करके 97वीं रैंकिंग तक पहुंच चुकी है लेकिन इस वैश्विक खेल के लिए ज्यादा कुछ किए जाने की जरूरत है वर्ना क्रिकेट ही हावी रहेगा। विजयन का मानना है कि हमारे क्लबों को विदेश के शीर्ष क्लबों के साथ टाईअप करने की जरूरत है।