फीफा अध्यक्ष सेप ब्लाटर के अचानक इस्तीफे के बाद नए अध्यक्ष के लिए रेस शुरू हो गई है। इस रेस में भारतीय मूल के एक अमेरिकी सुनील गुलाटी भी शामिल हैं जो यूएस सॉकर फेडरेशन में रिकॉर्ड तीसरी बार अध्यक्ष पद संभाल रहे हैं।
इलाहाबाद में जन्मे 55 साल के गुलाटी पांच साल की उम्र में परिवार के साथ अमेरिका आ गए थे। उन्होंने बीते दशकों में अमेरिकी फुटबॉल के विकास में बड़ी भूमिका अदा की है।
यूएस मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार अगर अमेरिका फीफा अध्यक्ष पद के चुनाव में दिलचस्पी लेता है तो सुनील गुलाटी बड़े दावेदार हो सकते हैं। गुलाटी को अमेरिकी रीजन और कैरेबियाई देशों में फुटबॉल का संचालन करने वाले कॉनकैफ का बड़ा समर्थन हासिल है।
पिछले हफ्ते फीफा अध्यक्ष पद पर चुने गए सेप ब्लाटर ने विश्व फुटबॉल में भ्रष्टाचार स्कैंडल के बाद मंगलवार को इस्तीफा दे दिया।
फीफा की कार्यकारी समिति के सदस्य गुलाटी ने ब्लाटर के इस्तीफे देने के फैसले का स्वागत किया है। ज्यूरिख में हुई फीफा कांग्रेस में अध्यक्ष के चुनाव में गुलाटी और अमेरिका ने ब्लाटर के प्रतिद्वंद्वी जॉर्डन के प्रिंस अली बिन अल हुसैन का समर्थन किया था। कोलंबिया यूनिवर्सिटी में इॅकानोमिक्स के प्रोफेसर गुलाटी वर्ष 2000 से 2006 तक यूएस सॉकर फेडरेशन में कार्यकारी उपाध्यक्ष थे और उसके बाद अध्यक्ष पद पर सुशोभित हैं।
जब 2009 में अमेरिका ने 2018 या 2022 में वर्ल्ड कप की मेजबानी करने का फैसला किया तब गुलाटी ने ही अमेरिकी दावेदारी समिति की बैठक की अध्यक्षता की थी। हालांकि अमेरिका को दोनों में से किसी वर्ल्ड कप की मेजबानी नहीं मिल सकी।
और भी कई बड़े नाम हैं फीफा अध्यक्ष पद के लिए रेस में
सैप ब्लाटर के फीफा अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद फुटबॉल के इस सबसे बड़े पद के लिए रेस फिर से शुरू हो गई है। ब्लाटर की जगह अब कौन लेगा यह अभी तय नहीं है लेकिन इस ताकतवर पद के लिए संभावित रेस में कुछ बड़े नाम चर्चा में आ गए हैं। अमेरिकी फुटबॉल संघ के भारतीय मूल के अध्यक्ष सुनील गुलाटी के अलावा अन्य कई नाम चर्चा में हैं।
माइकल प्लाटिनी: फ्रांस के पूर्व फुटबॉलर 59 साल के प्लाटिनी आठ साल से यूरोपीय संघ (यूएफा) के अध्यक्ष हैं।
प्रिंस अली बिन अल हुसैन: 39 वर्षीय जॉर्डन के प्रिंस अली बिन अल हुसैन ने ही पिछले हफ्ते चुनाव में ब्लाटर को चुनौती दी थी।
जिको: 62 वर्षीय जिको पूर्व ब्राजीली फुटबॉलर हैं। ब्राजील के खेल मंत्री रह चुके हैं। इस समय भारत के एफसी गोवा क्लब के कोच हैं।
लुइस फिगो: पुर्तगाल के 42 वर्षीय पूर्व फुटबॉलर पिछले हफ्ते हुए चुनाव में भी उम्मीदवार थे। बाद में प्रिंस अली के समर्थन में हट गए थे।
अन्य संभावित दावेदार: एशिया ओलंपिक परिषद के अध्यक्ष कुवैत के शेख अहमद अल फहाद अल सबाह, एशियाई फुटबॉल कन्फेडरेशन के अध्यक्ष बहरीन के शेख सलमान बिन इब्राहिम अल खलीफा,अफ्रीकी फुटबॉल प्रमुख कैमरून के 68 वर्षीय हायोतू, दक्षिण कोरिया के चुंग मोंग जून और अर्जेंटीनी पूर्व फुटबॉलर 54 वर्षीय डिएगो माराडोना के नाम की भी चर्चा है।
फीफा अध्यक्ष के रूप में इस्तीफा देने के बाद ब्लाटर ने कहा है कि जब तक नए चुनाव नहीं होते तब तक वह ही दायित्व संभालेंगे। उन्होंने विशेष कांग्रेस बुलाने की बात कही थी जोकि दिसंबर से मार्च के बीच हो सकती है।
फीफा के दो पूर्व अधिकारी इंटरपोल की मोस्ट वांटेड सूची में
सेप ब्लाटर के फीफा अध्यक्ष पद से इस्तीफे के बाद भी फुटबॉल में भ्रष्टाचार को लेकर उठा तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिकी मीडिया के मुताबिक अब एफबीआई फुटबॉल अधिकारियों को मिलियन डॉलर की दी गई कथित रिश्वत में ब्लाटर की भूमिका की जांच में लग गई है।
हालांकि अमेरिकी अटार्नी जनरल लोरेटा लिंच ने इस बात से इनकार किया है कि ब्लाटर भी एफबीआई के निशाने पर हैं लेकिन अमेरिकी मीडिया ने कानून प्रवर्तन अधिकारियों और अन्य सूत्रों के हवाले से कहा है कि ब्लाटर भी जांच के दायरे में हैं।
दूसरी ओर, इंटरपोल ने फीफा के पूर्व कार्यकारी सदस्य जैक वार्नर और निकोलस लियोज को मोस्ट वांटेड सूची में शामिल कर अंतरराष्ट्रीय अलर्ट जारी किया है। खेल मार्केट कंपनियों के चार प्रमुखों को भी सूची में रखा गया है।
ये अधिकारी 15 करोड़ डॉलर रिश्वतखोरी मामले में अमेरिकी जांचकर्ताओं की वांटेड सूची में हैं। पूर्व उपाध्यक्ष वार्नर इस समय त्रिनिदाद एंड टोबैगो में हैं जबकि कार्यकारी सदस्य लियोज पराग्वे में घर में नजरबंद हैं।
ऑस्ट्रेलिया फुटबॉल फेडरेशन के चेयरमैन फ्रेंक लोवी ने कहा है कि 2022 वर्ल्ड कप की मेजबानी की रेस क्लीन नहीं थी और इस बारे में उन्हें जो जानकारी थी वह उन्होंने जांचकर्ताओं के साथ साझी की है। ऑस्ट्रेलिया भी अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ 2022 वर्ल्ड कप की मेजबानी की होड़ में था जो बाद में कतर को दे दी गई जिस पर विवाद हुआ।
ऑस्ट्रेलिया ने अपने दावेदारी के लिए 31 मिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च किए थे लेकिन उन्हें सिर्फ एक ही वोट मिला। फ्रेंक लोवी ने कहा कि हमारी मेजबानी के दावे की पेशकश बिल्कुल स्वच्छ थी लेकिन हमारा अनुभव बेहद कड़वा रहा।