सुप्रीम कोर्ट में IOA के मामले पर सुनवाई हुई
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सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को अपने पूर्व जज जस्टिस नागेश्वर राव को भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) का संविधान संशोधन करने की जिम्मेदारी सौंप दी। जस्टिस राव की निगरानी में न सिर्फ संविधान का संशोधन होगा बल्कि उन्हीं की अगुवाई में 15 दिसंबर तक आईओए के चुनाव का रास्ता तैयार किया जाएगा। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और हिमा कोहली की पीठ ने 27 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के साथ होने वाली बैठक के लिए आईओए के महासचिव राजीव मेहता और उपाध्यक्ष आदिल सुमारीवाला को नियुक्ति किया है।
चुनाव के लिए मतदाता सूची भी तैयार करेंगे पूर्व जज
आदेश में कहा गया है कि जस्टिस राव की खेल मंत्रालय मदद करेगा और उनके सारे खर्च आईओए की ओर से वहन किए जाएंगे। संविधान संशोधन के साथ जस्टिस राव को आईओए चुनाव के लिए मतदाता सूची तैयार करने के भी जिम्मेदारी दी गई है। शीर्ष अदालत ने आदेश में कहा कि पूर्व जज देश में ओलंपिक के भविष्य को ध्यान रखते हुए साफ और विकासोन्मुखी दृष्टिकोण सुनिश्चत करेंगे। शीर्ष अदालत के आदेश के बाद आईओसी के साथ 27 सितंबर को लुसान (स्विटजरलैंड) में होने वाली बैठक में अब आईओए के दूसरे प्रतिनिधि आरके आनंद, पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष अनिल खन्ना और नामदेव शिरगांवकर बैठक में शिरकत नहीं कर पाएंगे।
नीता अंबानी, बिंद्रा भी आईओसी के साथ बैठक में हो सकते हैं प्रतिनिधि
सूत्र बताते हैं कि आईओसी के साथ बैठक में मेहता और सुमारीवाला के अलावा आईओसी सदस्य नीता अंबानी, खेल मंत्रालय के प्रतिनिधि केरूप में संयुक्त सचिव और आईओसी एथलीट कमीशन के सदस्य बीजिंग ओलंपिक के स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा भी शिरकत कर सकते हैं। आईओसी ने 8 सितंबर को आईओए के प्रशासन और लटकते आ रहे चुनाव के चलते उसे निलंबित करने की अंतिम चेतावनी दे दी थी। आईओसी ने कहा था कि अगर दिसंबर तक यह मुद्दे हल नहीं हुए तो उसे हर हाल में निलंबित कर दिया जाएगा। आईओए में चले आ रहे इन मुद्दों को सुलझाने के लिए आईओसी ने उसके साथ 27 सितंबर को बैठक तय की।
आईओसी ने ठुकराया बैठक टालने का अनुरोध
सूत्र बताते हैं कि आईओए की ओर से 27 सितंबर को आईओसी से होने वाली बैठक को टालने का भी अनुरोध किया गया था। राष्ट्रीय खेलों का हवाला देकर यह बैठक आगे बढ़ाने के लिए कहा गया था, लेकिन आईओसी ने इससे साफ इंकार कर दिया और बैठक 27 सितंबर को ही करने के लिए कहा। आईओसी ने आईओए में इस दौरान किसी भी अंतरिम या कार्यवाहक अध्यक्ष को मानने से इंकार करते हुए महासचिव राजीव मेहता को बातचीत के अधिकार दे दिए थे।