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डूरंड कप विशेषः कभी 2 रुपए का था टिकट, स्वतंत्रता के पहले से चला आ रहा भारत का यह प्रतिष्ठित फुटबॉल टूर्नामेंट

Wed, 23 Jul 2025 02:51 AM IST
Mayank Tripathi एन. अर्जुन, कोलकाता

सार

एशिया का सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट डूरंड कप का बुधवार यानी (आज) पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भव्य आगाज होने जा रहा है। इस बार यह पांच राज्यों में खेला जाएगा, जिसमें 24 टीमें हिस्सा ले रही हैं।
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डूरंड कप विजेता टीम को सम्मानित करते हुए तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एशिया का सबसे पुराना फुटबॉल टूर्नामेंट डूरंड कप का बुधवार यानी (आज) पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भव्य आगाज होने जा रहा है। डूरंड कप की शुरुआत 1888 में सर हेनरी डूरंड द्वारा की गई थी। नेशनल आर्काइव्स ऑफ इंडिया के रिकॉर्ड के अनुसार, 27 अक्तूबर 1928 को प्रकाशित दस्तावेजों में इसका उल्लेख मिलता है। इस बार यह पांच राज्यों में खेला जाएगा, जिसमें 24 टीमें हिस्सा ले रही हैं।
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डूरंड फुटबॉल टूर्नामेंट को भारत का ब्लू रिबैंड यानी सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट माना जाता रहा है। नेशनल आर्काइव्स ऑफ इंडिया के रिकॉर्ड के अनुसार, 27 अक्तूबर 1928 को प्रकाशित दस्तावेजों में इसका उल्लेख मिलता है। डूरंड कप की शुरुआत 1888 में सर हेनरी डूरंड द्वारा की गई थी, जब फुटबॉल ब्रिटिश छावनी क्षेत्रों में काफी लोकप्रिय था। प्रारंभिक वर्षों में यह टूर्नामेंट शिमला में आयोजित होता था और इसमें मुख्य रूप से ब्रिटिश रेजीमेंट्स हिस्सा लेती थीं। 1896 के रिकॉर्ड के अनुसार, पहले आठ वर्षों में "हाईलैंड बटालियन" और "दूसरी बटालियन हाईलैंड लाइट इन्फैंट्री" का दबदबा रहा।

चार और दो रुपए का था टिकट
1928 में आयोजित एक फाइनल मुकाबले में पंजाब के गवर्नर सर स्टुअर्ट साइम्स सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, जबकि उस वर्ष की ट्रॉफियां लॉर्ड इरविन ने वितरित की थीं। विजेता टीम थी "शेरवुड फॉरेस्टर्स"। 1935 में जनता के अधिक समर्थन के लिए डूरंड कप समिति ने विभागों को पत्र भेजकर कर्मचारियों को मैच देखने की अनुमति देने का अनुरोध किया था। बच्चों के लिए टिकट पर 50 प्रतिशत छूट की घोषणा की गई थी। उस समय सामान्य स्टैंड का टिकट 4 रुपए और साधारण एन्क्लोजर का 2 रुपए था।

1969 के डूरंड कप के विजेता गोरखा ब्रिगेड को सम्मानित करते हुए भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. जाकिर - फोटो : अमर उजाला
1969 में गोरखा ब्रिगेड ने बीएसएफ को हराया था
1940 के दशक की शुरुआत में यह टूर्नामेंट शिमला से दिल्ली स्थानांतरित हो गया। 1960 के दशक में डूरंड कप भारत में फुटबॉल प्रेमियों के बीच जबरदस्त आकर्षण बन चुका था। 1969 के फाइनल में गोरखा ब्रिगेड ने बीएसएफ जालंधर को हराया था। इस मैच की तस्वीरें और विजेता टीम की राष्ट्रपति वी.वी. गिरि के साथ फोटो राष्ट्रीय अखबारों में छपी थीं।

डूरंड कप की ट्रॉफी के साथ मोहन बागान के श्याम थापा और ईस्ट बंगाल के विक्टर अमलराज - फोटो : अमर उजाला
ईस्ट बंगाल ने 5-0 से मैच जीताः जीवनंद
दिल्ली के फुटबॉलर जीवनंद उपाध्याय, जो गढ़वाल हीरोज और शिमला यंग्स क्लब जैसे प्रमुख क्लबों से खेल चुके हैं, दिल्ली में हुए डूरंड कप की सुनहरी यादें आज भी साझा करते हैं। वे याद करते हैं कि 1972 में शिमला यंग्स ने ईस्ट बंगाल को सेमीफाइनल में बराबरी पर रोक दिया था, लेकिन रीमैच में ईस्ट बंगाल ने 5-0 से जीत हासिल की थी।
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अब ईस्टर्न कमांड की देख-रेख में होता है आयोजन
2019 से यह ऐतिहासिक टूर्नामेंट कोलकाता को केंद्र बनाकर ईस्टर्न कमांड की देखरेख में आयोजित हो रहा है। 2025 का संस्करण पांच शहरों—कोलकाता, शिलांग, इम्फाल, कोकराझार और जमशेदपुर—में आयोजित होगा। भारत के इस तीसरे सबसे पुराने फुटबॉल टूर्नामेंट को लेकर फुटबॉल प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है।
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