विनेश ने पेरिस ओलंपिक में महिला 50 किग्रा भार वर्ग के फाइनल में जगह बनाई थी, लेकिन स्वर्ण पदक मुकाबले से पहले ही उनका वजन निर्धारित सीमा से 100 ग्राम अधिक आया था, जिस कारण उन्हें अयोग्य करार दिया गया था। विनेश ने हालांकि संयुक्त रजत पदक देने की मांग पर खेल पंचाट (सीएएस) में अपील दायर की थी जिस पर सुनवाई पूरी हो गई थी।
भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट की अपील खेल पंचाट ने खारिज कर दी है। विनेश ने पेरिस ओलंपिक में महिला 50 किग्रा भार वर्ग के फाइनल में जगह बनाई थी, लेकिन स्वर्ण पदक मुकाबले से पहले ही उनका वजन निर्धारित सीमा से 100 ग्राम अधिक आया था, जिस कारण उन्हें अयोग्य करार दिया गया था। विनेश ने हालांकि संयुक्त रजत पदक देने की मांग पर खेल पंचाट (सीएएस) में अपील दायर की थी जिस पर सुनवाई पूरी हो गई थी। विनेश की अपील पर बार-बार फैसला टल रहा था, लेकिन अब सीएएस ने उनकी अपील खारिज कर दी है जिसका मतलब है कि उनका पदक जीतने का सपना टूट गया। इस फैसले के मायने हैं कि पेरिस ओलंपिक में भारत के छह ही पदक होंगे जिसमें एक रजत और पांच कांस्य शामिल हैं।
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पीटी उषा ने फैसले पर जताई निराशा
भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की अध्यक्ष पीटी उषा ने खेल पंचाट के विनेश फोगाट की यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के खिलाफ की गई अपील को खारिज करने पर निराशा व्यक्त की है। आईओए अध्यक्ष ने बयान में कहा, पहलवान विनेश फोगाट की युनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के खिलाफ दायर अपील पर खेल पंचाट के एकमात्र पंच के फैसले से स्तब्ध और निराश हूं। पेरिस ओलंपिक खेलों में महिलाओं के 50 किलो ग्राम वर्ग में साझा रजत पदक दिए जाने के विनेश के आवेदन को खारिज करने वाले 14 अगस्त के फैसले का प्रभावी हिस्सा विशेष रूप से उनके लिए और बड़े पैमाने पर खेल समुदाय के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ रखता है।
आईओए ने अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में अस्पष्ट नियमों और उनकी व्याख्याओं को लेकर कड़ी आलोचना की है। आईओए ने एक बयान में कहा, 100 ग्राम की मामूली विसंगति और उसके परिणाम का गहरा प्रभाव पड़ता है, न केवल विनेश के करियर के संदर्भ में, बल्कि अस्पष्ट नियमों और उनकी व्याख्या के बारे में भी गंभीर सवाल उठाता है। आईओए का मानना है कि दो दिन में से दूसरे दिन किसी खिलाड़ी को वजन में इतनी मामूली सी विसंगति के लिए पूरी तरह अयोग्य करार देने के मामले की गहरी समीक्षा की जरूरत है। विनेश का मामला बताता है कि कड़े और अमानवीय नियम खिलाड़ियों खासकर महिला खिलाड़ियों के शारीरिक और मनोवैज्ञानिक तनावों को समझने में नाकाम रहे हैं।
आईओए ने कहा कि यह फैसला अधिक न्यायसंगत और उचित मानकों की आवश्यकता की सख्त याद दिलाता है जो एथलीटों की भलाई को प्राथमिकता देते हैं। इस मामले में भले ही विनेश के पक्ष में सहानुभूति रही हो लेकिन अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के प्रमुख थॉमस बाक और यूडब्ल्यूडब्ल्यू के प्रमुख नेनाद लालोविच ने कहा था कि नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता क्योंकि ऐसी छूट देने के व्यापक परिणाम होंगे।
विनेश ने क्यों की थी अपील?
पिछले मंगलवार को जापान की युई सुसाकी के खिलाफ जीत सहित तीन जीत के साथ महिलाओं की 50 किग्रा फ्रीस्टाइल स्पर्धा के फाइनल में पहुंचने वाली विनेश को अंतत: स्वर्ण पदक जीतने वाली अमेरिका की सारा हिल्डेब्रांट के खिलाफ खिताबी मुकाबले से बाहर कर दिया गया क्योंकि सुबह वजन करते समय उनका वजन निर्धारित सीमा से 100 ग्राम अधिक पाया गया था। इस पहलवान ने पिछले बुधवार को खेल पंचाट में इस फैसले के खिलाफ अपील की और मांग की कि उसे क्यूबा की पहलवान युस्नेलिस गुजमेन लोपेज के साथ संयुक्त रजत पदक दिया जाए। लोपेज सेमीफाइनल में विनेश से हार गई थी, लेकिन बाद में भारतीय पहलवान को अयोग्य घोषित किए जाने के बाद उन्हें फाइनल में जगह मिली। अयोग्य ठहराए जाने के एक दिन बाद विनेश ने खेल से संन्यास की घोषणा करते हुए कहा कि उनके पास खेल जारी रखने की ताकत नहीं है। हालांकि, दुनिया भर के दिग्गज खिलाड़ियों ने इस 29 वर्षीय पहलवान का समर्थन किया है जो अपने तीसरे ओलंपिक खेलों में भाग ले रही थी।
तीन बार टला फैसला
इस मामले पर नौ अगस्त को ही सुनवाई हुई थी और माना जा रहा था कि फैसला उसी दिन आ जाएगा, लेकिन इसे 10 अगस्त तक के लिए टाला गया था। फिर इसे टालकर 13 अगस्त को कर दिया गया था। मंगलवार को जानकारी दी गई थी कि विनेश के मामले में फैसला 16 अगस्त को रात साढ़े नौ बजे फैसला आएगा, लेकिन खेल पंचाट ने बुधवार रात ही अपना फैसला सुना दिया जिससे विनेश की उम्मीदों को झटका लगा।