फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lakshya Sen Story: दादा की विरासत को बढ़ाया आगे, बैडमिंटन कोच पिता ने बेटे के लिए छोड़ा था शहर

Mon, 08 Aug 2022 05:06 PM IST
रोहित राज स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, बर्मिंघम

सार

लक्ष्य सेन को उनकी मंजिल तक पहुंचाने के लिए उनके पिता डीके सेन ने दिन-रात एक कर दिया। उत्तराखंड के अल्मोड़ा के रहने वाले लक्ष्य की सफलता की कहानी काफी रोचक है।
विज्ञापन
लक्ष्य सेन - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत के युवा बैडमिंटन खिलाड़ी लक्ष्य सेन ने राष्ट्रमंडल खेलों में कमाल कर दिया है। उन्होंने पुरुष एकल के फाइनल में मलेशिया एंग जे यॉन्ग को हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया है। उनका राष्ट्रमंडल खेलों में यह पहला पदक है। इस साल थॉमस कप जीतने वाली टीम के सदस्य रहे लक्ष्य पिछले एक साल में भारत के टॉप शटलर बनकर सामने आए हैं। उत्तराखंड के अल्मोड़ा के रहने वाले लक्ष्य की सफलता की कहानी काफी रोचक है।
विज्ञापन


लक्ष्य सेन को उनकी मंजिल तक पहुंचाने के लिए उनके पिता डीके सेन ने दिन-रात एक कर दिया। डीके सेन ने अपने दोनों बेटों को बेहतर बैडमिंटन खिलाड़ी बनाने के लिए अल्मोड़ा तक छोड़ दिया और बेंगलुरु चले गए। हालांकि, अल्मोड़ा से उनका रिश्ता अब भी है और लक्ष्य वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने के बाद वहां गए भी थे।

लक्ष्य सेन - फोटो : सोशल मीडिया
लक्ष्य के दादा भी थे बैडमिंटन खिलाड़ी
लक्ष्य के दादा सीएल सेन बैडमिंटन के एक बेहतरीन खिलाड़ी थे। उन्होंने राज्य और राष्ट्रीय स्तर की कई प्रतियोगिताएं जीतीं थीं। उनकी लगन और जज्बे के कारण अल्मोड़ा में बैडमिंटन को बढ़ावा मिला। इसी के चलते उन्हें अल्मोड़ा में बैडमिंटन का पुरोधा भी माना जाता है। उस विरासत को अब लक्ष्य ने आगे बढ़ाया है। उन्होंने सिर्फ राज्य या देश में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवाया है।

लक्ष्य सेन - फोटो : सोशल मीडिया
प्रकाश पादुकोण अकादमी से जुड़े हैं पिता
लक्ष्य के पिता डीके सेन बैडमिंटन के जाने-माने कोच हैं और वर्तमान में प्रकाश पादुकोण अकादमी से जुड़े हैं। पिता की देखरेख में लक्ष्य ने होश संभालते ही बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया और वह चार साल की उम्र से स्टेडियम जाने लगे। छह-सात साल की उम्र में ही लक्ष्य का खेल और उसकी प्रतिभा हर किसी को हैरान करती थी।

लक्ष्य सेन - फोटो : सोशल मीडिया
लक्ष्य के भाई हैं बैडमिंटन खिलाड़ी
लक्ष्य सेन के बड़े भाई चिराग सेन भी अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। चिराग जूनियर राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप और जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में नंबर दो रह चुके हैं। 2018 में लक्ष्य ने जूनियर एशियन बैडमिंटन चैंपियनशिप अपने नाम की थी। उसके बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा है। वह लगातार बड़े टूर्नामेंट में जीत हासिल कर रहे हैं। वर्ल्ड चैंपियनशिप और थॉमस कप पदक के बाद अब उनकी झोली में राष्ट्रमंडल खेलों का भी पदक आ गया है।
विज्ञापन

लक्ष्य सेन की उपलब्धियां
टूर्नामेंट साल स्पर्धा पदक
वर्ल्ड चैंपियनशिप 2021 एकल कांस्य
थॉमस कप 2022 मिक्स्ड टीम स्वर्ण
राष्ट्रमंडल खेल 2022 एकल स्वर्ण
राष्ट्रमंडल खेल 2022 मिक्स्ड टीम रजत
एशिया टीम चैंपियनशिप 2020 पुरुष टीम कांस्य
यूथ ओलंपिक 2018 एकल रजत
यूथ ओलंपिक 2018 मिक्स्ड टीम  स्वर्ण
वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप 2018 एकल कांस्य
एशियन जूनियर चैंपियनशिप 2018 एकल स्वर्ण
एशियन जूनियर चैंपियनशिप 2016 एकल कांस्य
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें