कुश्ती की ओलंपिक में दावेदारी कायम रखने के लिए फीला ने इस खेल का नए सिरे से कायाकल्प करने का निर्णय लिया है।
सौ साल पुराने रीति रिवाजों पर खेले जा रहे इस खेल में न सिर्फ ग्लैमर का तड़का लगेगा बल्कि महिलाओं को प्रमुखता दी जाएगी।
फीला के अंतरिम अध्यक्ष सर्बिया के नेनाद लालोविच ने अमर उजाला को साफ कर दिया इस खेल की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए बड़े स्तर पर नियमों में परिवर्तन किया जाएगा।
सेंट पीटर्सबर्ग में आईओसी के समक्ष प्रस्तुतिकरण से पहले इन सभी मुद्दों को मई में होने वाली फीला कांग्रेस में रखकर पारित कराया जाएगा।
एशियाई चैंपियनशिप में कुश्ती बचाओ अभियान के तहत अपनी रणनीति बताने आए नेनाद ने बताया उनके समक्ष बड़ी चुनौती है।
दूसरे खेल जहां अपने को ओलंपिक में शामिल कराने के लिए पिछले दो सालों से काम कर रहे हैं वहीं उन्हें दो माह का समय मिला है।
बावजूद इसके वह आईओसी की जरूरी मांगें पूरी करने जा रहे हैं। उनका पहला लक्ष्य खेल संघों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया लागू करने की होगी। साथ ही फीला अपने संविधान में संशोधन कर महिलाओं की भागीदारी बढ़ाएगा।
आईओसी के समक्ष प्रस्ताव में यह भी कहा जाएगा कि महिलाओं के चार के स्थान पर छह भार वर्गों में मुकाबले हों, जबकि फ्रीस्टाइल व ग्रीको रोमन में सात-सात के स्थान पर छह वर्ग होंगे। यह खेल कुछ बोझिल हुआ है इसे और तेज बनाया जाएगा। इसके लिए बड़े स्तर पर नियमों में परिवर्तन होगा।
यह प्रक्रिया अभी चल रही है। उन्होंने बॉक्सिंग का उदाहरण दिया कि यहां बॉक्सर की एंट्री से लेकर रिंग तक में ग्लैमर है। ऐसा ही कुश्ती में करने की कोशिश है। टीवी के अनुरुप खेल को बनाया जाएगा। जबकि तीनों ही वर्गों की कुश्ती में बाउट ड्रेस को भी बदलने की योजना है।
यह सब फीला कांग्रेस में पास होने के बाद ही होगा। लेकिन नेनाद दुनिया भर में पहलवानों की ओर से ओलंपिक में जीते गए अपने पदकों को वापस किए जाने को गलत ठहराया। इससे उनके अभियान को झटका लग रहा है। यह उन्हें दुखी करने वाला है। आईओसी भी इससे चिंतित है।
भारतीय इंतजामों से नाखुश फीला अध्यक्ष
एशियाई चैंपियनशिप में मैट के पीछे बनाया गया वीवीआईपी मंच फीला अध्यक्ष को नागवार गुजरा है। उन्होंने साफ कहा कि ओलंपिक में कुश्ती को रखना है तो यह सब बंद करना होगा। इसे टीवी के अनुरूप बनाना होगा। यह सब इस तरह की हरकतों से नहीं होगा। सीधे प्रसारण के दौरान मैट के बाहर सिर्फ रेफरी नजर आने चाहिए। इस तरह की भीड़ नहीं।